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आर. माधवन ने 'धुरंधर' पर आलोचनाओं का किया सामना

आर. माधवन ने अपनी फिल्मों 'धुरंधर' और 'धुरंधर: द रिवेंज' पर चल रही आलोचनाओं का सामना किया है। उन्होंने प्रोपेगैंडा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य कहानी और किरदारों को वास्तविकता के अनुसार प्रस्तुत करना है। माधवन ने भारतीय दृष्टिकोण पर अपने विचार साझा किए और बताया कि कैसे किरदारों की सच्चाइयों को दिखाना जरूरी है। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी राजनीतिक सोच पर भी प्रकाश डाला। जानें पूरी कहानी में उनके विचार और फिल्म की सच्चाई।
 

आर. माधवन की फिल्म 'धुरंधर' पर उठे सवाल


आर. माधवन ने अपनी फिल्मों 'धुरंधर' और 'धुरंधर: द रिवेंज' पर चल रही आलोचनाओं के बारे में खुलकर चर्चा की है। कुछ समीक्षकों ने इन फिल्मों को प्रोपेगैंडा करार दिया है। माधवन ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि उनका उद्देश्य कहानी और पात्रों को वास्तविकता के अनुसार प्रस्तुत करना है।


भारतीय दृष्टिकोण पर माधवन का विचार

माधवन ने 'गलाटा प्लस' के साथ बातचीत में कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि किसी फिल्म को भारतीय दृष्टिकोण से दिखाना गलत क्यों है। उन्होंने 'धुरंधर' पर लगे प्रोपेगैंडा के आरोपों पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, फिल्म पाकिस्तान पर आधारित थी, जहां अच्छी और बुरी दोनों चीजें मौजूद हैं, जैसे भारत में। माधवन ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक संदेश को फैलाना नहीं था।


किरदारों की वास्तविकता को दर्शाना

माधवन ने अपनी फिल्म 'रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट' का उदाहरण देते हुए कहा कि नंबी नारायणन की जिंदगी की सच्चाइयों को फिल्म में दिखाना कहानी के प्रति ईमानदारी का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति मंदिर जाता है, तो इसे इस डर से नहीं हटाया जा सकता कि लोग इसे किसी विशेष विचार से जोड़ देंगे।


राजनीतिक विचारों पर माधवन की राय

माधवन ने अपनी राजनीतिक सोच के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा से देश को प्राथमिकता देने और उसके लिए काम करने की शिक्षा मिली है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने कभी किसी राजनीतिक पार्टी या नेता के खिलाफ गलत बातें नहीं की हैं। माधवन ने कहा कि उनका मुख्य कार्य फिल्मों और किरदारों के माध्यम से कहानियां प्रस्तुत करना है, न कि किसी राजनीतिक दल का समर्थन करना।


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