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आरएसएस की शताब्दी वर्षगांठ पर मोहन भागवत का महत्वपूर्ण संबोधन

नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्षगांठ पर मोहन भागवत ने शिक्षा, संस्कृति और तकनीक के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को संस्कारित बनाना भी है। भागवत ने स्वदेशी के महत्व और असहिष्णुता के बढ़ते मुद्दों पर भी विचार किए। इस अवसर पर आरएसएस ने एक लाख से अधिक 'हिंदू सम्मेलनों' का आयोजन करने की योजना बनाई है। जानें उनके संबोधन की और भी महत्वपूर्ण बातें।
 

आरएसएस की शताब्दी वर्षगांठ का आयोजन

नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्षगांठ के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मीडिया से बातचीत की। यह कार्यक्रम तीन दिनों तक चला, जिसमें उन्होंने शिक्षा, परंपरा, तकनीक और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाने पर अपने विचार साझा किए। भागवत ने स्पष्ट किया कि तकनीक और आधुनिकता शिक्षा के विरोधी नहीं हैं, बल्कि शिक्षा का उद्देश्य संस्कार और संस्कृति के साथ जीवन मूल्यों को विकसित करना होना चाहिए।


शिक्षा का उद्देश्य

मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना नहीं है, बल्कि व्यक्ति को संस्कारित बनाना भी है। उन्होंने पंचकोशीय शिक्षा (पांच आयामी समग्र शिक्षा) का उल्लेख करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति को ज्ञानवान के साथ-साथ मूल्यवान और चरित्रवान बनाना आवश्यक है।


अंग्रेज़ी और नई शिक्षा नीति पर विचार

अंग्रेज़ी शिक्षा पर विचार

अंग्रेज़ी शिक्षा के बारे में बात करते हुए भागवत ने कहा कि अंग्रेज़ी सीखने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन इसके साथ हमें अपनी संस्कृति और परंपरा को भी बनाए रखना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि हमारी शिक्षा प्रणाली को आधुनिक विज्ञान और तकनीक को अपनाना चाहिए, लेकिन यह भारतीय मूल्यों और संस्कारों पर आधारित होनी चाहिए।


स्वदेशी और वैश्विक जुड़ाव

स्वदेशी का महत्व

कार्यक्रम के दूसरे दिन, भागवत ने स्वदेशी का महत्व बताते हुए कहा कि इसका असली अर्थ यह है कि राष्ट्र अपनी पसंद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और सहयोग करे, न कि किसी दबाव में आकर। उन्होंने यह भी कहा कि आज की दुनिया में असहिष्णुता और कट्टरता बढ़ रही है, जहां लोग विपरीत विचारों को अस्वीकार कर देते हैं।


शताब्दी वर्ष की तैयारियां

आरएसएस का जनसंपर्क अभियान

यह ध्यान देने योग्य है कि आरएसएस ने अपने 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में बड़े पैमाने पर जनसंपर्क अभियान की योजना बनाई है। इस दौरान एक लाख से अधिक 'हिंदू सम्मेलनों' का आयोजन किया जाएगा। इसकी शुरुआत इस वर्ष विजयादशमी (2 अक्टूबर) को नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में मोहन भागवत के संबोधन से होगी। इस पूरे अभियान का उद्देश्य संघ की विचारधारा को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।