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इक्कीस: एक भावुक युद्ध ड्रामा जो दर्शकों को कर रहा है मंत्रमुग्ध

फिल्म 'इक्कीस', जो नए साल के पहले दिन रिलीज हुई, ने दर्शकों का दिल जीत लिया है। यह फिल्म 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की सच्ची कहानी पर आधारित है। दर्शकों ने इसे मास्टरपीस बताते हुए इसकी भावुकता और अदाकारी की सराहना की है। धर्मेंद्र की यह अंतिम फिल्म है, और अगस्त्य नंदा की परफॉर्मेंस को भी काफी सराहा जा रहा है। जानें इस फिल्म की खासियतें और दर्शकों की प्रतिक्रियाएं।
 

फिल्म का संक्षिप्त परिचय


इक्कीस रिव्यू: नए साल के पहले दिन प्रदर्शित हुई फिल्म 'इक्कीस' ने दर्शकों का दिल जीत लिया है। इस युद्ध ड्रामे का निर्देशन श्रीराम राघवन ने किया है, और यह 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की वास्तविक कहानी पर आधारित है। फिल्म में अगस्त्य नंदा ने मुख्य भूमिका निभाई है, और यह दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म भी है। रिलीज के साथ ही सोशल मीडिया पर फिल्म के लिए समीक्षाओं की बाढ़ आ गई है।


दर्शकों की प्रतिक्रियाएं

दर्शकों की तारीफ और भावुक प्रतिक्रियाएं


X यूजर्स फिल्म को मास्टरपीस मानते हुए इसे देशभक्ति की भावना को गहराई से महसूस कराने वाला बताते हैं। एक यूजर ने लिखा, "इक्कीस देखकर रोंगटे खड़े हो गए, खासकर आखिरी 20 मिनट में पलक झपकाना मुश्किल था।" दूसरे यूजर ने कहा, "धर्मेंद्र जी की स्क्रीन प्रेजेंस देख आंखें भर आई। यह उनकी सबसे भावुक परफॉर्मेंस है।" अगस्त्य नंदा की अदाकारी की भी प्रशंसा हो रही है।



लोगों का कहना है कि उन्होंने चुनौतीपूर्ण भूमिका में ईमानदारी दिखाई और बड़े पर्दे पर शानदार डेब्यू किया। जयदीप अहलावत को भी सरप्राइज पैकेज बताया जा रहा है, जिन्होंने पाकिस्तानी अधिकारी का किरदार निभाया है।


फिल्म की विशेषताएं

बाकी फिल्मों से अलग है इक्कीस


'इक्कीस' अन्य युद्ध फिल्मों से भिन्न है। यह न केवल बहादुरी को दर्शाती है, बल्कि युद्ध के बाद के दर्द, परिवार की पीड़ा और मानवीय पहलुओं को भी उजागर करती है। निर्देशन की सराहना करते हुए दर्शकों ने कहा है कि श्रीराम राघवन ने कहानी को संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया है। फिल्म का संगीत और संपादन भी प्रभावशाली है, और कई समीक्षाओं में इसे 4 से 4.5 स्टार दिए गए हैं।



अरुण खेत्रपाल की वीरता

अरुण खेत्रपाल की बहादुरी


यह फिल्म अरुण खेत्रपाल की जिंदगी पर आधारित है, जिन्होंने केवल 21 वर्ष की आयु में बसंतर की लड़ाई में 10 दुश्मन टैंकों को नष्ट किया। शहीद होने के बाद भी उनकी वीरता की मिसाल दी जाती है। पाकिस्तानी अधिकारी ने उनके पिता से कहा था कि उनके बेटे के कारण पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा। यह कहानी दर्शकों को गर्व और भावुक दोनों कर रही है।