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ओपी नैय्यर और लता मंगेशकर: संगीत की दुनिया का अनकहा विवाद

ओपी नैय्यर और लता मंगेशकर के बीच का विवाद हिंदी सिनेमा की एक अनकही कहानी है। ओपी नैय्यर, जो अपने समय के सबसे महंगे संगीतकारों में से एक थे, ने कभी लता मंगेशकर के साथ काम नहीं किया। जानें इस विवाद की जड़ और इसके पीछे की कहानी, जिसने संगीत की दुनिया को प्रभावित किया। क्या होता अगर ये दोनों दिग्गज एक साथ आते? इस लेख में जानें।
 

ओपी नैय्यर का संगीत सफर


मुंबई: ओपी नैय्यर को हिंदी सिनेमा के उन संगीतकारों में गिना जाता है, जिनकी धुनें सुनते ही मन में मधुर यादें ताजा हो जाती हैं। उनके प्रसिद्ध गाने जैसे 'इशारों इशारों में दिल लेने वाले', 'जाने कहां मेरा जिगर गया जी', और 'लेके पहला पहला प्यार' आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उनके संगीत में पंजाबी लोक संगीत की झलक और अनोखी ताल का अनुभव होता है, जो उन्हें अन्य संगीतकारों से अलग बनाता था।


जीवन और करियर की शुरुआत

ओपी नैय्यर का जन्म 16 जनवरी 1926 को लाहौर में हुआ। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया। भले ही उन्होंने औपचारिक संगीत शिक्षा नहीं ली, लेकिन उनकी प्रतिभा और प्रयोगों ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। 1950 से 1970 के दशक में, वह अपने दम पर फिल्मों को हिट कराने के लिए जाने जाते थे और उस समय के सबसे महंगे संगीतकारों में से एक थे।


लता मंगेशकर का जादू

इस दौरान लता मंगेशकर हिंदी सिनेमा की सबसे प्रमुख गायिका बन चुकी थीं। उनकी आवाज का जादू हर संगीतकार और निर्माता पर छाया हुआ था। बड़े फिल्म निर्माता उनके साथ काम करने के लिए उत्सुक रहते थे। लेकिन यह जानकर आश्चर्य होता है कि ओपी नैय्यर ने कभी लता मंगेशकर के साथ कोई गाना नहीं गवाया।


विवाद की जड़

इसका कारण फिल्म 'आसमान' के दौरान की एक घटना मानी जाती है। कहा जाता है कि ओपी नैय्यर ने एक सहनायिका के लिए एक गाना तैयार किया था और चाहते थे कि लता मंगेशकर इसे गाएं। उस समय लता मंगेशकर शीर्ष गायिका थीं और आमतौर पर मुख्य नायिका के लिए ही गाती थीं। उन्हें यह प्रस्ताव पसंद नहीं आया और उन्होंने गाने से मना कर दिया।


जिद और गुस्सा

लता मंगेशकर के इनकार से ओपी नैय्यर को गहरा आघात लगा। वह अपने स्वभाव के अनुसार जिद्दी माने जाते थे और काम के प्रति समझौता नहीं करते थे। इसी गुस्से में उन्होंने यह तय कर लिया कि वह आगे कभी लता मंगेशकर के साथ काम नहीं करेंगे। इस तरह दोनों दिग्गजों के रास्ते हमेशा के लिए अलग हो गए।


दिलचस्प बात यह है कि ओपी नैय्यर और लता मंगेशकर ने सार्वजनिक रूप से कभी इस विवाद को स्वीकार नहीं किया, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में उनके मतभेदों के किस्से मशहूर हो गए। लोग अक्सर चर्चा करते रहे कि अगर दोनों साथ आते तो संगीत की दुनिया को कितने और यादगार गीत मिलते।