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कमल हासन ने 'जना नायगन' फिल्म पर सेंसरशिप विवाद पर उठाया सवाल

कमल हासन ने 'जना नायगन' फिल्म पर चल रहे सेंसरशिप विवाद पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया और फिल्म निर्माण की पारदर्शिता की कमी के आर्थिक प्रभावों पर भी चर्चा की। हासन ने फिल्म इंडस्ट्री से एकजुट होकर सरकार के साथ सार्थक बातचीत करने का आग्रह किया। उनका मानना है कि यह मुद्दा केवल एक फिल्म के भाग्य से अधिक महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश के संवैधानिक लोकतंत्र में कला और कलाकारों के महत्व को दर्शाता है।
 

कमल हासन की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चिंता

थलपति विजय की हालिया फिल्म 'जना नायगन' को लेकर चल रहा सेंसरशिप विवाद अब एक गंभीर वैचारिक बहस का रूप ले चुका है। पोंगल के अवसर पर फिल्म की रिलीज पर रोक और सेंसर बोर्ड द्वारा प्रमाण पत्र न दिए जाने के बाद, साउथ सिनेमा के मशहूर अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि फिल्म को रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। इस घटनाक्रम के बाद, कमल हासन ने खुलकर अपनी बात रखी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा फिल्म सेंसरिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की।


कमल हासन का बयान

कमल ने X पर अपने विचार साझा करते हुए, अपने आधिकारिक राज्यसभा लेटरहेड पर एक बयान जारी किया। उन्होंने इसे "कला के लिए, कलाकारों के लिए, संविधान के लिए" शीर्षक दिया। पत्र में, उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जिसे तर्क के साथ बनाए रखा जाना चाहिए और पारदर्शिता की कमी से कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा केवल एक फिल्म के भाग्य से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दर्शाता है कि देश अपने संवैधानिक लोकतंत्र में कला और कलाकारों को कितना महत्व देता है।


फिल्म निर्माण का सामूहिक प्रयास

कमल ने यह भी बताया कि फिल्म बनाना एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें लेखकों, तकनीकी कर्मचारियों, कलाकारों, और कई छोटे व्यवसायों का योगदान होता है, जो इस उद्योग पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा, "जब स्पष्टता नहीं होती है, तो रचनात्मकता सीमित हो जाती है, आर्थिक गतिविधि बाधित होती है, और जनता का विश्वास कमज़ोर होता है।"


पारदर्शिता की कमी का प्रभाव

उनका तर्क इस बात पर केंद्रित था कि पारदर्शिता की कमी न केवल कलात्मक स्वतंत्रता को दबाती है, बल्कि आर्थिक नुकसान भी पहुंचाती है और दर्शकों का विश्वास भी कम करती है। कमल ने फिल्म सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर "सैद्धांतिक रूप से फिर से विचार" करने की मांग की। उन्होंने सुधारों की वकालत की, जिसमें सर्टिफिकेशन के लिए तय समय-सीमा, पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रियाएं, और किसी भी आवश्यक कट या बदलाव के लिए लिखित स्पष्टीकरण शामिल हैं।


फिल्म इंडस्ट्री से एकजुटता की अपील

कमल ने फिल्म इंडस्ट्री से एकजुट होकर सरकार के साथ "सार्थक, रचनात्मक" बातचीत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसा सुधार बहुत आवश्यक है, जो रचनात्मक स्वतंत्रता की रक्षा करेगा और भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करेगा। कमल अगली बार डायरेक्टर शंकर की फिल्म 'इंडियन 3' में नजर आएंगे।


फिल्म 'जना नायगन' में थलपति विजय का लीड रोल

फिल्म 'जना नायगन' में थलपति विजय मुख्य भूमिका में हैं।