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क्या 'Honeymoon Se Hatya' है ट्रू-क्राइम डॉक्यूमेंट्री का नया चेहरा?

ZEE5 की नई डॉक्यूमेंट्री 'Honeymoon Se Hatya' सच्ची घटनाओं पर आधारित है, जो भारत के चर्चित हत्याकांडों को दर्शाती है। इस सीरीज में जानें कि किन परिस्थितियों में कुछ महिलाओं ने अपने पतियों की हत्या का कदम उठाया। क्या यह सीरीज दर्शकों को कुछ नया अनुभव देती है या फिर पहले से ज्ञात तथ्यों का पुनरावृत्ति है? जानें इस डॉक्यूमेंट्री की खासियतें और कमियां, और यह तय करें कि क्या आपको इसे देखना चाहिए।
 

हनीमून से हत्या: एक अनोखी डॉक्यूमेंट्री


हनीमून से हत्या रिव्यू: यदि आप सच्ची घटनाओं पर आधारित डॉक्यूमेंट्री देखने के शौकीन हैं, तो ZEE5 की ओरिजिनल सीरीज 'Honeymoon Se Hatya: Why Women Kill' आपकी वॉचलिस्ट में शामिल हो सकती है। यह सीरीज उन विवाहों की कहानी प्रस्तुत करती है, जिनका अंत सात फेरों के बाद नहीं, बल्कि एक भयानक हत्या पर होता है।


पांच एपिसोड की यह डॉक्यू-ड्रामा सीरीज भारत के कुछ ऐसे मामलों पर आधारित है, जिन्होंने अपने समय में पूरे देश को झकझोर दिया था। हालांकि विषय गंभीर है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सीरीज दर्शकों को कुछ नया अनुभव देती है या फिर पहले से चर्चित घटनाओं का पुनरावृत्ति बनकर रह जाती है?


ZEE5 पर ट्रू-क्राइम डॉक्यूमेंट्री का आगाज़

ZEE5 पर रिलीज हुई यह डॉक्यूमेंट्री किसी काल्पनिक थ्रिलर की तरह नहीं, बल्कि पूरी तरह सच्ची घटनाओं पर आधारित है। 'Honeymoon Se Hatya: Why Women Kill' में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि किन परिस्थितियों में कुछ महिलाओं ने अपने पतियों की हत्या का कदम उठाया।


सीरीज का ध्यान केवल हत्या पर नहीं है, बल्कि यह समझने की कोशिश करती है कि ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई। क्या महिलाएं मानसिक दबाव में थीं, मजबूरी में थीं या किसी साजिश का हिस्सा थीं? इन सवालों के उत्तर खोजने का प्रयास किया गया है।


चर्चित मामलों की पुनरावृत्ति

यह डॉक्यू-सीरीज भारत के कुछ सबसे चर्चित मामलों को फिर से सामने लाती है, जिनमें शामिल हैं:



  • इंदौर का सोनम-राजा रघुवंशी केस

  • मेरठ ब्लू ड्रम केस

  • भिवानी इन्फ्लुएंसर केस

  • मुंबई नालासोपारा टाइल केस

  • दिल्ली इलेक्ट्रिक शॉक केस


इन मामलों ने न केवल मीडिया में सुर्खियां बटोरीं, बल्कि समाज में रिश्तों और अपराध पर गंभीर बहस भी छेड़ी।


डायरेक्शन और प्रस्तुति

डायरेक्टर अजितेश शर्मा ने कहानी को सनसनीखेज बनाने के बजाय यथार्थ के करीब रखने का प्रयास किया है। सीरीज में पुलिस अधिकारियों और पीड़ित परिवारों के इंटरव्यू शामिल हैं, जो इसे विश्वसनीय बनाते हैं।


सिनेमैटोग्राफी में कुछ वास्तविक फुटेज का उपयोग किया गया है, लेकिन चूंकि इन मामलों का मीडिया कवरेज पहले ही व्यापक रहा है, दर्शकों को कुछ नया देखने को नहीं मिलता। अच्छी बात यह है कि सीरीज में अनावश्यक ड्रामा या शोर नहीं है और यह हत्या के बाद परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी दर्शाती है।


डॉक्यूमेंट्री की कमियां

यदि आप नियमित रूप से क्राइम न्यूज का अनुसरण करते हैं, तो यह सीरीज आपको ज्यादा चौंकाने वाली नहीं लगेगी। कई स्थानों पर ऐसा लगता है कि वही पुरानी खबरें और ज्ञात तथ्य दोहराए जा रहे हैं। किसी बड़े या नए खुलासे की कमी स्पष्ट है।


हालांकि हर केस में साइकेट्रिस्ट और क्रिमिनल साइकोलॉजिस्ट यह समझाने का प्रयास करते हैं कि महिलाओं ने यह कदम क्यों उठाया, लेकिन यह पहलू पूरी गहराई तक नहीं पहुंच पाता। सीरीज यह तो पूछती है कि 'औरत कत्ल करने की हद तक कैसे पहुंचती है?', लेकिन इसका ठोस उत्तर देने में पीछे रह जाती है।


क्या देखनी चाहिए यह सीरीज?

यदि आपको ट्रू-क्राइम डॉक्यूमेंट्री पसंद हैं और आप भारत के चर्चित हत्याकांडों को फिर से समझना चाहते हैं, तो 'हनीमून से हत्या' देखी जा सकती है। लेकिन यदि आप किसी बड़े सस्पेंस, नए खुलासे या बेहद थ्रिलिंग ट्रीटमेंट की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह सीरीज आपको निराश कर सकती है।