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क्या रजनीकांत को विजय की सफलता से जलन है? अभिनेता ने खुद किया खुलासा

दक्षिण भारतीय राजनीति और फिल्म उद्योग में चल रही चर्चाओं के बीच, रजनीकांत ने विजय की राजनीतिक सफलता पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ईर्ष्या के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके और विजय के बीच उम्र का बड़ा अंतर है। रजनीकांत ने विजय को शुभकामनाएं दीं और कहा कि उनकी दोस्ती राजनीति से ऊपर है। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और रजनीकांत के ताजा बयान में क्या कुछ खास है।
 

रजनीकांत ने विजय की राजनीतिक सफलता पर अपनी प्रतिक्रिया दी


नई दिल्ली: दक्षिण भारतीय राजनीति और फिल्म उद्योग में इन दिनों एक महत्वपूर्ण चर्चा चल रही है। तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय के बारे में सोशल मीडिया पर कई प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इसी बीच, हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता रजनीकांत पर यह आरोप लगाया गया कि वे विजय की राजनीतिक उपलब्धियों से संतुष्ट नहीं हैं और उनसे ईर्ष्या करते हैं। इन अटकलों पर रजनीकांत ने अब खुद अपनी बात रखी है।


दावों को किया खारिज


रजनीकांत ने अपने निवास पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन सभी दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विजय से कोई विवाद या जलन नहीं है। रजनीकांत ने बताया कि वे विजय से लगभग 25 साल बड़े हैं और दोनों के बीच एक स्पष्ट पीढ़ी का अंतर है, इसलिए ईर्ष्या जैसी बातें बेमानी हैं। उन्होंने कहा कि जब वे खुद सक्रिय राजनीति में नहीं हैं, तो किसी अन्य नेता की सफलता से प्रभावित होने का सवाल ही नहीं उठता।




विजय को दी शुभकामनाएं


रजनीकांत ने आगे कहा कि वे विजय के लिए शुभकामनाएं देते हैं और आशा करते हैं कि वह जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विजय के प्रति लोगों में काफी उम्मीदें हैं और उनका मानना है कि वह अपने कार्यों से सभी को संतुष्ट करेंगे। अभिनेता ने यह भी बताया कि उनके खिलाफ चल रही आलोचनाएं उन्हें दुखी करती हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बिना किसी कारण के यह अफवाह फैला रहे हैं कि वे मुख्यमंत्री विजय से जलते हैं, जबकि यह पूरी तरह से गलत है।


दोस्ती राजनीति से ऊपर है


रजनीकांत ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम के बाद वे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin से मिले थे। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात केवल व्यक्तिगत संबंधों के कारण थी, जिसे गलत तरीके से राजनीतिक रंग दिया गया। रजनीकांत के अनुसार, उनकी दोस्ती राजनीति से ऊपर है और इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे 2021 में चुनावी मैदान में उतरे होते, तो परिणाम उनके पक्ष में जा सकता था, लेकिन यह सिर्फ एक विचार था।


अटकलों पर अब विराम


यह विवाद तब शुरू हुआ जब विजय की कथित राजनीतिक सफलता के बाद रजनीकांत की कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई और बाद में उनकी स्टालिन से मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें फैलने लगीं। रजनीकांत के हालिया बयान के बाद उम्मीद की जा रही है कि इन सभी अटकलों पर अब विराम लग जाएगा।