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क्या है 'पति पत्नी और वो दो' की कहानी? जानें इस कॉमेडी फिल्म की खास बातें

आयुष्मान खुराना की नई फिल्म 'पति पत्नी और वो दो' एक अराजक कॉमेडी है जो रिश्तों की उलझनों और गलतफहमियों पर आधारित है। फिल्म में प्रजापति पांडे की कहानी है, जो अपनी पुरानी सहपाठी चंचल के लौटने के बाद कई मजेदार परिस्थितियों में फंस जाते हैं। हालांकि फिल्म में कुछ कमियां हैं, लेकिन इसकी तेज रफ्तार कॉमेडी और कलाकारों की केमिस्ट्री इसे देखने लायक बनाती है। क्या यह फिल्म आपके लिए है? जानने के लिए पढ़ें पूरी समीक्षा।
 

फिल्म का संक्षिप्त परिचय


पति पत्नी और वो दो रिव्यू: आयुष्मान खुराना की नई फिल्म 'पति पत्नी और वो दो' एक ऐसी कॉमेडी है जो तर्क से ज्यादा अपनी अराजकता और हास्य पर निर्भर करती है। इस फिल्म में रिश्तों की उलझनें, गलतफहमियां और ओवरड्रामैटिक किरदार दर्शकों को एक अनोखी कॉमिक दुनिया में ले जाते हैं। हालांकि, यह फिल्म कई बार अत्यधिक लाउड और अतिरंजित लगती है, लेकिन अपनी ऊर्जा और मनोरंजन के कारण दर्शकों को बांधने में सफल रहती है।


कहानी की जटिलताएं

फिल्म की कहानी प्रयागराज में रहने वाले प्रजापति पांडे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो वन विभाग में अधिकारी हैं। उनकी जिंदगी अपनी पत्रकार पत्नी अपर्णा के साथ शांत चल रही होती है, तभी उनकी पुरानी सहपाठी चंचल अचानक उनकी जिंदगी में लौट आती है।


चंचल अपने प्रेमी सनी के साथ भागने की योजना में फंसी होती है और परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि प्रजापति को उसका प्रेमी होने का नाटक करना पड़ता है। इसके बाद कहानी में गलतफहमियों और रिश्तों की उलझनों का सिलसिला शुरू हो जाता है।


फिल्म का पागलपन

'पति पत्नी और वो दो' पूरी तरह से अतिशयोक्ति पर आधारित है। हर किरदार जरूरत से ज्यादा नाटकीय है और हर घटना सामान्य से कहीं अधिक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई है।


फिल्म में तेंदुआ, भेड़िया, नकली रिश्ते और बेतुके संयोग लगातार कहानी को और अधिक अराजक बनाते हैं। कई बार यह सब अविश्वसनीय लगता है, लेकिन फिल्म की खास बात यही है कि यह खुद को गंभीरता से लेने की कोशिश नहीं करती।


आयुष्मान खुराना का प्रदर्शन

आयुष्मान खुराना एक बार फिर छोटे शहर के सीधे-सादे लेकिन परेशान युवक के किरदार में शानदार नजर आते हैं। वह अपने अभिनय से फिल्म की कमजोर पटकथा को भी संभाल लेते हैं।


कभी बेबस तो कभी हास्यास्पद परिस्थितियों में फंसे प्रजापति के रूप में आयुष्मान दर्शकों को लगातार एंटरटेन करते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी साबित होती है।


सपोर्टिंग कास्ट का योगदान

वामिका गब्बी ने अपर्णा के किरदार में प्रभाव छोड़ा है। वहीं, सारा अली खान को ऐसा किरदार दिया गया है जिसमें उनकी ओवर-द-टॉप शैली सहज लगती है।


रकुल प्रीत सिंह भी अपनी भूमिका में प्रभावशाली नजर आती हैं, लेकिन फिल्म में सबसे ज्यादा ध्यान आयशा रज़ा खींचती हैं। बुआ-जी के किरदार में उनका हास्य और संवाद अदायगी कई दृश्यों को मजेदार बना देती है।


फिल्म की कमियां

फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसकी जरूरत से ज्यादा लंबी और खिंची हुई कॉमेडी है। कई मजाक बार-बार दोहराए गए लगते हैं और कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा नाटकीय हो जाते हैं।


इसके अलावा, समलैंगिक किरदारों का रूढ़िवादी चित्रण भी कई जगह असहज महसूस होता है। कहानी कई बार इतनी बिखर जाती है कि दर्शक तर्क ढूंढना छोड़ देते हैं।


फिल्म देखने का कारण

अगर आप गंभीर फिल्मों और क्राइम थ्रिलर से हटकर हल्की-फुल्की, बिना ज्यादा दिमाग लगाए देखने वाली कॉमेडी फिल्म पसंद करते हैं, तो 'पति पत्नी और वो दो' आपको पसंद आ सकती है।


यह फिल्म अपनी अजीबोगरीब दुनिया, तेज रफ्तार कॉमेडी और कलाकारों की शानदार केमिस्ट्री के दम पर मनोरंजन करने में सफल रहती है। यह परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन अपनी पूरी अव्यवस्था के बावजूद दर्शकों को हंसाने की कोशिश ईमानदारी से करती है।