गुजराती फिल्म 'लालो- कृष्ण सदा सहायते' ने तोड़ा रिकॉर्ड, जानें इसकी सफलता का राज़
एक अनोखी फिल्म की कहानी
2025 में एक गुजराती फिल्म ने बिना किसी बड़े प्रचार के एक अद्वितीय रिकॉर्ड स्थापित किया, जिसने फिल्म उद्योग को चौंका दिया। इस कम बजट की फिल्म ने 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की और साल की सबसे अधिक लाभ कमाने वाली फिल्म बन गई। इस फिल्म का नाम है 'लालो- कृष्ण सदा सहायते', जिसकी लोकप्रियता अब भाषाई सीमाओं को पार कर चुकी है।
हिंदी में भी हुई रिलीज
फिल्म की अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए इसे हिंदी में भी रिलीज किया गया है। इसके निर्देशक अंकित सखिया ने हाल ही में इस फिल्म से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि इस फिल्म को देखने के बाद 23 लोगों ने उन्हें संदेश भेजकर कहा कि इसने उनकी जान बचाई और उन्हें जीने की नई उम्मीद दी।
फिल्म का निर्माण कैसे हुआ?
'लालो- कृष्ण सदा सहायते' को बेहद सीमित संसाधनों में बनाया गया। इसका फिल्मांकन एक सिंगल कैमरा से किया गया, जिसे निर्देशक ने अपने मित्र से उधार लिया था। कम बजट के बावजूद, फिल्म की कहानी और भावनात्मक गहराई ने दर्शकों के दिलों को छू लिया, जो इसकी सबसे बड़ी ताकत बन गई।
निर्माण का उद्देश्य
अंकित सखिया ने मीडिया से बातचीत में बताया कि इस फिल्म का विचार कैसे आया। उन्होंने कहा कि उन्हें एक फिल्म बनाने का विचार था और इसे कम बजट में कैसे बनाया जाए, इस पर ध्यान केंद्रित किया। इसके लिए उन्हें एक स्थान, एक अभिनेता और आसपास की चीजों की आवश्यकता थी, जिनमें उनका पैसा खर्च न हो। इसी सोच के साथ उन्होंने स्क्रिप्ट लिखना शुरू किया।
शुरुआत में दर्शकों की कमी
निर्देशक के अनुसार, फिल्म की शुरुआत में दर्शकों की कमी थी। अंकित ने बताया कि रिलीज के पहले दिनों में कोई भी इसे देखने नहीं आया। लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने एक-दूसरे को फिल्म के बारे में बताया और दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी। देखते ही देखते, यह फिल्म एक ब्लॉकबस्टर बन गई।
जब उनसे पूछा गया कि फिल्म की सफलता का कारण क्या है, तो उन्होंने कहा कि यह फिल्म हर किसी से जुड़ती है। इसके साथ एक दिव्य ऊर्जा भी जुड़ी थी, जिसने लोगों को आकर्षित किया।
आत्महत्या के विचार छोड़ने वाले दर्शक
फिल्म को हिंदी में रिलीज करने के पीछे की वजह बताते हुए अंकित सखिया ने एक भावुक अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि फिल्म देखकर लोग ठीक हो रहे थे। 23 लोगों ने कहा कि वे आत्महत्या करने वाले थे, लेकिन फिल्म देखने के बाद उन्हें उम्मीद मिली। इसलिए, हमने इसे हिंदी में लाने का निर्णय लिया।
कहानी की ताकत
'लालो- कृष्ण सदा सहायते' की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि एक मजबूत कहानी बिना बड़े सितारों और भारी बजट के भी दर्शकों के दिलों तक पहुंच सकती है। यह फिल्म न केवल कमाई के मामले में सफल रही, बल्कि लोगों की जिंदगी पर इसके सकारात्मक प्रभाव ने इसे विशेष बना दिया।