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गोलू देवता मंदिर: न्याय के देवता की महिमा

गोलू देवता मंदिर, उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित है, जहाँ भक्त न्याय के देवता गोलू महाराज से अपनी समस्याओं का समाधान मांगते हैं। इस मंदिर की विशेषता हजारों घंटियाँ और भक्तों द्वारा लिखी गई अर्जियाँ हैं। गोलू महाराज की पौराणिक कथा भी दिलचस्प है, जिसमें उन्हें न्यायप्रिय शासक के रूप में दर्शाया गया है। जानें इस अद्भुत मंदिर और इसके पीछे की कहानियों के बारे में।
 

गोलू देवता मंदिर का परिचय

गोलू देवता मंदिर: उत्तराखंड के कुमाऊं और पूर्वी गढ़वाल क्षेत्र में गोलू महाराज, जिन्हें गोलू देवता या गोलज्यू के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रमुख लोक देवता हैं। इन्हें 'न्याय का देवता' माना जाता है, जहाँ लोग अपनी समस्याओं और कानूनी विवादों के समाधान के लिए आते हैं। भक्त अपनी अर्जी गोलू देवता को चढ़ाते हैं और जब उनकी मनोकामना पूरी होती है, तो घंटियाँ चढ़ाई जाती हैं। गोलू महाराज को भगवान शिव का अवतार (गौर भैरव) माना जाता है। चितई गोलू देवता मंदिर, जो अल्मोड़ा में स्थित है, अपनी हजारों घंटियों और भक्तों द्वारा लिखी गई अर्जियों के लिए प्रसिद्ध है। अल्मोड़ा से पिथौरागढ़ की ओर जाते समय, यह मंदिर एक महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है।



 


पौराणिक कथा: लोक कथाओं के अनुसार, गोलू महाराज कत्यूरी राजा झाल राय और रानी कलिंगा के पुत्र थे। जन्म के समय उनकी सौतेली माताओं ने ईर्ष्या के कारण उन्हें एक पत्थर से बदल दिया था, लेकिन अंततः उन्होंने अपनी पहचान साबित की और न्यायप्रिय शासक बने।
सवारी: उन्हें अक्सर सफेद घोड़े पर सवार एक योद्धा के रूप में दर्शाया जाता है, जिनके हाथ में धनुष और बाण होते हैं।