जनजातियों के विकास के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक
भारत में जनजातीय विकास की चुनौतियाँ
Editorial | राजीव रंजन तिवारी |
भारत में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या मुख्यतः प्राकृतिक संसाधनों के निकट निवास करती है और सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से कमजोर स्थिति में है। ये लोग गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और विकास परियोजनाओं के कारण विस्थापन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हालांकि संवैधानिक आरक्षण और सरकारी योजनाओं के माध्यम से कुछ सुधार हो रहे हैं, फिर भी वे मुख्यधारा से दूर हैं। विभिन्न राज्य और केंद्र सरकारें इस दिशा में कई योजनाएँ लागू कर रही हैं, लेकिन क्या केवल योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन स्तर में सुधार संभव है? शायद नहीं। इसके लिए योजनाओं का सही क्रियान्वयन भी आवश्यक है।
मानव विकास सूचकांक में सुधार
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने हाल ही में लोकसभा में बताया कि संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) हर साल मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) जारी करता है। यह सूचकांक जन्म के समय जीवन प्रत्याशा, औसत स्कूली शिक्षा के वर्षों और प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय के आधार पर मापा जाता है। यूएनडीपी की मानव विकास रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत का एचडीआई 2010 में 0.590 से बढ़कर 2023 में 0.685 हो गया है।
अनुसूचित जनजातियों का उपभोग व्यय
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा किए गए घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस) 2023-24 के अनुसार, ग्रामीण और शहरी अनुसूचित जनजातियों का औसत मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय क्रमशः 3363 रुपये और 6030 रुपये है। यह दर्शाता है कि समय के साथ अनुसूचित जनजातियों के लिए औसत उपभोग व्यय में वृद्धि हुई है।
सरकारी योजनाओं का प्रभाव
सरकार द्वारा अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए कई योजनाएँ लागू की जा रही हैं। इनमें जनजातीय विकास कार्य योजना और जनजातीय उप योजना शामिल हैं। इसके अलावा, 41 मंत्रालय/विभाग अनुसूचित जनजातियों और गैर-अनुसूचित जनजातीय आबादी के बीच विकासात्मक अंतरों को पाटने के लिए विभिन्न परियोजनाओं के लिए धन आवंटित कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन
प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम) के तहत, जनजातीय कार्य मंत्रालय जनजातीय आजीविका को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ लागू कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत, जनजातीय उद्यमिता को मजबूत करने और प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षा और छात्रवृत्ति योजनाएँ
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) के तहत, जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए 440 ईएमआरएस स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, अनुसूचित जनजातियों के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएँ भी लागू की जा रही हैं, जो उनकी शिक्षा को समर्थन प्रदान करती हैं।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार जनजातियों के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रयासरत है। लेकिन सवाल यह है कि इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव क्या है और कितने लोगों को इसका लाभ मिल रहा है। सरकार को पारदर्शिता के साथ इस दिशा में काम करना चाहिए।