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जयललिता की 78वीं जयंती: सिनेमा से राजनीति तक का सफर

जयललिता, दक्षिण भारतीय सिनेमा और राजनीति की एक प्रमुख हस्ती, आज अपनी 78वीं जयंती मना रही हैं। उन्होंने 13 साल की उम्र में फिल्मी करियर की शुरुआत की और बाद में राजनीति में कदम रखा, जहां उन्होंने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के रूप में छह बार कार्य किया। उनके जीवन की कहानी संघर्ष, सफलता और जन समर्थन की मिसाल है। जानें उनके फिल्मी सफर, राजनीतिक उपलब्धियों और अंतिम यात्रा के बारे में।
 

जयललिता का जीवन और योगदान


दक्षिण भारतीय सिनेमा और राजनीति की प्रमुख हस्ती जयललिता को आज उनकी 78वीं जयंती पर याद किया जा रहा है। उन्होंने मात्र 13 वर्ष की आयु में फिल्म उद्योग में कदम रखा और लगभग तीन दशकों तक दर्शकों का मनोरंजन किया। बाद में, राजनीति में प्रवेश करते हुए, उन्होंने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के रूप में छह बार कार्य किया। लाखों लोगों के दिलों में 'अम्मा' और 'थलाइवी' के नाम से जानी जाने वाली जयललिता का जीवन संघर्ष, सफलता और जन समर्थन का प्रतीक है। उनका निधन 2016 में हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है.


फिल्मी करियर की शुरुआत

जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 को कर्नाटक के मेलकोट में हुआ। उन्होंने 13 साल की उम्र में कन्नड़ फिल्म 'श्रीशैला महात्मे' से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने तमिल, तेलुगू और हिंदी सिनेमा में भी काम किया। अपने करियर के दौरान, उन्होंने 140 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें से एमजी रामचंद्रन के साथ 28 और शिवाजी गणेशन के साथ 17 फिल्में विशेष रूप से यादगार रहीं।


राजनीति में प्रभावी कदम

फिल्मों के बाद, जयललिता ने 1989 में एआईएडीएमके की अध्यक्षता संभाली और 1991 में पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद उन्होंने 2001, 2002, 2011, 2015 और 2016 में भी मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। छह बार मुख्यमंत्री बनना उनकी राजनीतिक ताकत का प्रमाण है, और जनता उन्हें 'अम्मा' के नाम से पुकारती थी।


बेटे की भव्य शादी

जयललिता ने कभी विवाह नहीं किया, लेकिन 1995 में उन्होंने शशिकला के भतीजे वी.एन. सुधाकरन को गोद लिया। 7 सितंबर 1995 को उनकी शादी में लगभग डेढ़ लाख मेहमान शामिल हुए। इस भव्य आयोजन पर उन्होंने काफी खर्च किया, जो उस समय चर्चा का विषय बना और उनकी शानो-शौकत का प्रतीक बन गया।


अंतिम यात्रा और विरासत

67 वर्ष की आयु में, जयललिता का निधन 2016 में चेन्नई में हुआ। उनकी अंतिम यात्रा में लाखों लोग शामिल हुए, जिन्होंने उन्हें 'थलाइवी' और 'अम्मा' के नाम से याद किया। आज भी तमिलनाडु में उनकी लोकप्रियता और योगदान को लोग सम्मान के साथ याद करते हैं। उनका जीवन संघर्ष और सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी है।