जावेद अख्तर ने तालिबान के नए कानून की निंदा की
जावेद अख्तर की तालिबान के कानून पर प्रतिक्रिया
मुंबई: जावेद अख्तर ने तालिबान द्वारा लागू किए गए नए कानून की कड़ी आलोचना की है, जिसमें घरेलू हिंसा को कुछ शर्तों के तहत वैध माना गया है। अफगानिस्तान में तालिबान ने एक नया आपराधिक संहिता पेश किया है, जिस पर उनके सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने हस्ताक्षर किए हैं। इस 90 पृष्ठ के कोड में घरेलू हिंसा से संबंधित नियमों ने वैश्विक स्तर पर आक्रोश उत्पन्न किया है।
तालिबान के नए कानून पर जावेद अख्तर की कड़ी प्रतिक्रिया
सूत्रों के अनुसार, नए कानून के तहत पति को अपनी पत्नी को मारने या शारीरिक दंड देने की अनुमति है, बशर्ते कि इससे हड्डियां न टूटें या गंभीर चोटें न आएं। यदि पति इतनी जोर से मारता है कि चोट या नीले निशान पड़ जाएं, तो भी सजा केवल 15 दिनों की कैद तक सीमित है, और इसके लिए महिला को अदालत में सबूत पेश करना होगा। गंभीर चोटों पर ही मामूली सजा का प्रावधान है, जबकि अन्य प्रकार की हिंसा पर कोई सख्त रोक नहीं है।
इसके अलावा, यदि कोई पत्नी बिना पति की अनुमति के अपने माता-पिता या रिश्तेदारों के घर जाती है और वहां रहती है, तो उसे तीन महीने की जेल हो सकती है। यह नियम महिलाओं को और अधिक बंधन में डालता है। प्रसिद्ध गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने 21 फरवरी को इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी।
'धर्म के नाम पर किया जा रहा'
उन्होंने लिखा, “तालिबान ने पत्नी को मारने को वैध कर दिया है लेकिन बिना हड्डी टूटे। अगर पत्नी बिना पति की इजाजत के मायके जाती है तो तीन महीने की जेल। मैं भारत के मुफ्तियों और मौलवियों से अपील करता हूं कि वे इसे बिना शर्त निंदा करें क्योंकि यह सब उनके धर्म के नाम पर किया जा रहा है.” जावेद अख्तर का यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोग उनकी बात से सहमत हैं और कह रहे हैं कि धर्म के नाम पर ऐसी क्रूरता को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने भी इसे खतरनाक बताया है, जो महिलाओं के खिलाफ हिंसा को कानूनी मान्यता देता है।
यह घटना अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति पर फिर से सवाल उठा रही है। तालिबान के शासन में पहले से ही महिलाओं के शिक्षा, काम और आजादी पर कई पाबंदियां हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठन इसकी निंदा कर रहे हैं और कह रहे हैं कि यह महिलाओं को जानवरों से भी कम दर्जा देता है। जावेद अख्तर जैसे सेलेब्स की आवाज से उम्मीद है कि इस मुद्दे पर ज्यादा ध्यान जाएगा और दुनिया भर में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए दबाव बनेगा। यह खबर न सिर्फ अफगानिस्तान की, बल्कि पूरे विश्व की चिंता का विषय बन गई है.