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दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन: भारतीय सिनेमा में शोक की लहर

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया, जिससे भारतीय सिनेमा में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके अभिनय करियर में 'क्रांतिवीर' जैसी चर्चित फिल्म का विशेष स्थान है, जिसके लिए उन्हें दिलीप कुमार का आशीर्वाद मिला था। इस लेख में नाना पाटेकर के जीवन, उनकी फिल्मों और दिलीप कुमार के साथ उनके संबंधों की चर्चा की गई है।
 

नाना पाटेकर का निधन

प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर, जिन्होंने 'सलाम बॉम्बे!', 'खामोशी' और 'वेलकम' जैसी कई यादगार फिल्मों में अपने बहुआयामी अभिनय से दर्शकों का दिल जीता, का 76 वर्ष की आयु में गोवा में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय फिल्म उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई है। नाना पाटेकर की फिल्मी यात्रा में 1994 में आई उनकी हिट फिल्म 'क्रांतिवीर' का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म की सफलता की भविष्यवाणी हिंदी सिनेमा के 'ट्रेजेडी किंग' दिलीप कुमार ने की थी।


दिलीप कुमार की भविष्यवाणी

दिलीप कुमार की इस टिप्पणी का जिक्र 'क्रांतिवीर' के निर्देशक मेहुल कुमार ने दो साल पहले फिल्म के 30 साल पूरे होने के अवसर पर किया था। उन्होंने बताया कि दिलीप कुमार ने सुनील दत्त के 'अजंता आर्ट्स' में 'क्रांतिवीर' का ट्रायल देखा था। इस दौरान दिलीप कुमार, सायरा बानो और उनके परिवार के कुछ सदस्य भी मौजूद थे। फिल्म देखने के बाद दिलीप कुमार ने मेहुल कुमार से कहा कि उन्होंने ऐसी फिल्म बनाई है जिसका असर लंबे समय तक रहेगा।


दिलीप कुमार का आशीर्वाद

मेहुल कुमार ने आगे बताया कि दिलीप कुमार ने नरगिस की तस्वीर की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्होंने 'मदर इंडिया' का ट्रायल देखने के बाद नरगिस से कहा था कि यह फिल्म हमेशा उनके साथ रहेगी। दिलीप कुमार ने नाना को भी यही संदेश दिया कि 'क्रांतिवीर' का नाम हमेशा उनके साथ जुड़ा रहेगा।


पुरस्कार और सम्मान

नाना पाटेकर को 'क्रांतिवीर' के लिए मिला एकमात्र फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिलीप कुमार ने ही प्रदान किया था। एक साक्षात्कार में पाटेकर ने बताया कि दिलीप कुमार ने उन्हें अपने घर बुलाया था, जहां उन्होंने बारिश में भीगने के बाद उन्हें तौलिया और कुर्ता दिया। पाटेकर ने कहा कि इसके बाद उन्हें किसी और पुरस्कार की आवश्यकता नहीं थी।


फिल्म 'क्रांतिवीर' की सफलता

'क्रांतिवीर' का निर्देशन और निर्माण मेहुल कुमार ने किया था, जिसमें नाना पाटेकर, डिंपल कपाड़िया, अतुल अग्निहोत्री और ममता कुलकर्णी ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। इस फिल्म ने चार फिल्मफेयर पुरस्कार और एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते थे। नाना पाटेकर ने फिल्म में एक स्वतंत्रता सेनानी के बेटे की भूमिका निभाई थी, जो बाद में गरीबों के कल्याण के लिए संघर्ष करता है। उनका संवाद 'ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून...' आज भी हिंदी फिल्मों में सांप्रदायिक सौहार्द पर प्रभावशाली दृश्यों में गिना जाता है।