धुरंधर 2 और टॉक्सिक के बीच बॉक्स ऑफिस पर बड़ा मुकाबला
धुरंधर 2 और टॉक्सिक का टकराव
मुंबई: रणवीर सिंह की आगामी फिल्म 'धुरंधर 2', जिसका पूरा नाम 'धुरंधर द रिवेंज' है, जल्द ही सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली है। इसी दिन यश की फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन अप्स' भी रिलीज होने के लिए तैयार है। इन दोनों फिल्मों के बीच होने वाला टकराव इस वर्ष का सबसे बड़ा बॉक्स ऑफिस मुकाबला माना जा रहा है। इस उच्च स्तर के मुकाबले पर फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने एक विस्तृत नोट साझा किया है, जिसमें उन्होंने अपनी राय व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह नॉर्थ बनाम साउथ या बॉलीवुड बनाम सैंडलवुड की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह दो विभिन्न सिनेमा दृष्टिकोणों के बीच सीधी टक्कर है।
राम गोपाल वर्मा की राय
राम गोपाल वर्मा ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि दोनों फिल्मों में मुख्य अंतर यह है कि 'धुरंधर' दर्शकों की समझदारी का सम्मान करती है, जबकि 'टॉक्सिक' उन्हें कम आंकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब किसी फिल्म में हीरो की पूजा और ऊंची आवाज वाले बैकग्राउंड म्यूजिक पर जोर दिया जाता है, तो वह दर्शकों को सोचने का अवसर नहीं देती। वर्मा के अनुसार, 'धुरंधर' जैसी फिल्में कठिन कहानियों को बताने से नहीं डरतीं और मानती हैं कि दर्शक खुद निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि आम दर्शक मसाला फार्मूले से कहीं अधिक समझदार हैं।
आदित्य धर की सराहना
वर्मा ने निर्देशक आदित्य धर की खुलकर प्रशंसा की। उनका कहना है कि आदित्य ने फिल्म बनाते समय कभी भी दर्शकों को हल्के में नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि 'धुरंधर' ने पहले भी बड़े स्तर पर कमाई कर यह साबित किया था कि कंटेंट पर भरोसा करने वाली फिल्में वैश्विक स्तर पर पहचान बना सकती हैं। उनका मानना है कि दर्शक अब केवल तमाशा नहीं, बल्कि मजबूत कहानी भी चाहते हैं। इसलिए यह मुकाबला सिर्फ स्टार पावर का नहीं, बल्कि सोच का भी है।
टॉक्सिक पर अलग दृष्टिकोण
वहीं, यश की फिल्म 'टॉक्सिक' को बड़े पैमाने पर एक्शन और विजुअल्स के लिए जाना जा रहा है। फैंस इस फिल्म को लेकर बेहद उत्साहित हैं। वर्मा के बयान के बाद, दोनों फिल्मों के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे मनोरंजन बनाम कंटेंट की बहस के रूप में देख रहे हैं। वहीं, कुछ का मानना है कि दोनों फिल्मों का अपना अलग दर्शक वर्ग है और बॉक्स ऑफिस पर असली फैसला जनता करेगी।
भविष्य की उम्मीद
राम गोपाल वर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका बयान किसी विशेष व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के भविष्य के प्रति उनकी उम्मीद का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वह 19 मार्च का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि दर्शक किस प्रकार की फिल्म को प्राथमिकता देते हैं।