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नाना पाटेकर: किसानों के लिए समर्पित एक अद्वितीय अभिनेता

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन सभी के लिए एक बड़ा सदमा है। उनकी सामाजिक कार्यों के प्रति प्रतिबद्धता और किसानों के प्रति उनकी चिंता ने उन्हें एक अद्वितीय व्यक्तित्व बना दिया। जानिए उनके जीवन के कुछ महत्वपूर्ण किस्से और उनके योगदान के बारे में।
 

नाना पाटेकर का निधन: एक युग का अंत


मुंबई। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने सभी को चौंका दिया है। नाना पाटेकर को न केवल उनके अभिनय के लिए, बल्कि उनके सामाजिक कार्यों के लिए भी जाना जाता था। आज हम आपको एक ऐसा किस्सा बताएंगे जब उन्होंने किसानों की भलाई के लिए एक महंगी कार खरीदने से मना कर दिया था।


क्या नाना पाटेकर के गुस्से से प्रोड्यूसर्स को नुकसान हुआ?

लेखक रणबीर पुष्प ने एक साक्षात्कार में नाना पाटेकर के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि लोगों ने उनके बारे में गलत धारणा बना ली है। उन्होंने यह भी बताया कि नाना के गुस्से के कारण प्रोड्यूसर्स को नुकसान उठाने के दावे गलत हैं।


किसानों के प्रति नाना पाटेकर की चिंता

रणबीर पुष्प ने बताया कि एक दिन नाना पाटेकर ने समाचार में किसानों की आत्महत्या की खबर देखी। उन्होंने अगले दिन 1.5 करोड़ की कार खरीदने का मन बना लिया था, लेकिन उस खबर को सुनने के बाद उन्होंने अपने दोस्त को फोन किया और कहा कि सभी किसानों को 15-15 हजार के चेक बांट दें। नाना पाटेकर ने NAAM फाउंडेशन की स्थापना की थी और हमेशा किसानों की मदद के लिए तत्पर रहते थे।


नाना पाटेकर का गुस्सा

रणबीर ने बताया कि नाना पाटेकर का गुस्सा तब भड़कता था जब वह किसी को गंदगी फैलाते हुए देखते थे। एक बार उन्होंने देखा कि कोई व्यक्ति अपनी कार से प्लास्टिक की बोतल फेंक रहा था। उन्होंने अपनी गाड़ी रोकी और उस बोतल को उठाया, फिर उस व्यक्ति से कहा कि क्या वह अपने देश को साफ रखने की जिम्मेदारी नहीं समझता?


75 वर्ष की आयु में अंतिम सांस

नाना पाटेकर ने 75 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उन्हें गोवा में गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया और अस्पताल ले जाने पर भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। मणिपाल अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें बचाने के लिए 45 मिनट तक सीपीआर दिया गया, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।


नाना पाटेकर का करियर

नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई और तीन नेशनल अवॉर्ड जीते। 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। उनकी प्रसिद्ध फिल्मों में परिंदा, तिरंगा, वेलकम, अपहरण और अब तक छप्पन शामिल हैं।