☰
×

प्रो. सीएम सिंह बने एपिडेमियोलॉजी फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह को एपिडेमियोलॉजी फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह निर्णय चंडीगढ़ में हुई बैठक में लिया गया। उनकी नई भूमिका में जनस्वास्थ्य, महामारी विज्ञान और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद है। ईएफआई के माध्यम से विभिन्न बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीतियाँ विकसित की जाएंगी। जानें इस नई जिम्मेदारी के बारे में और कैसे यह स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करेगा।
 

प्रो. सीएम सिंह की नई जिम्मेदारी

लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के निदेशक प्रो. सीएम सिंह को एपिडेमियोलॉजी फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह निर्णय 3 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में हुई ईएफआई गवर्निंग काउंसिल की बैठक में लिया गया। प्रो. सीएम सिंह की यह उपलब्धि न केवल डॉ. आरएमएलआईएमएस बल्कि पूरे प्रदेश के चिकित्सा और जनस्वास्थ्य क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उनके जनस्वास्थ्य, महामारी विज्ञान, चिकित्सा शिक्षा और शोध में योगदान को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व सौंपा गया है।


एपिडेमियोलॉजी फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया का मुख्य उद्देश्य विभिन्न बीमारियों के फैलाव, उनके जोखिम कारकों और प्रभावित जनसंख्या का वैज्ञानिक अध्ययन करना है, ताकि बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीतियाँ विकसित की जा सकें।


प्रो. सीएम सिंह के नेतृत्व में ईएफआई महामारी से संबंधित सर्वेक्षण, जनसंख्या-आधारित शोध और बीमारी की निगरानी को बढ़ावा देने का कार्य करेगा। इन अध्ययनों से यह जानने में मदद मिलेगी कि किसी क्षेत्र में कौन-सी बीमारियाँ बढ़ रही हैं, उनके प्रमुख कारण क्या हैं, और वर्तमान स्वास्थ्य सेवाओं और जनस्वास्थ्य आवश्यकताओं के बीच क्या अंतराल हैं।


विशेष रूप से मौलिक और प्राथमिक रोकथाम पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्राथमिक रोकथाम का उद्देश्य मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोग जैसे जोखिम कारकों को विकसित होने से पहले ही रोकना है।


समुदाय, विद्यालयों, कार्यस्थलों और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में महामारी से संबंधित सर्वेक्षणों के माध्यम से खान-पान, शारीरिक गतिविधि, मोटापा, तंबाकू सेवन, तनाव, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे जोखिम कारकों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा। इस डेटा के आधार पर सबूत-आधारित स्वास्थ्य नीतियाँ और बीमारी से बचाव के कार्यक्रम तैयार करने में मदद मिलेगी।


ईएफआई के माध्यम से युवा चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को महामारी विज्ञान, अनुसंधान पद्धति, जैव-सांख्यिकी और जन-स्वास्थ्य अनुसंधान में प्रशिक्षण देने के साथ-साथ विभिन्न संस्थानों के बीच बहु-केंद्रित शोध को भी बढ़ावा दिया जाएगा। डॉ. आरएमएलआईएमएस परिवार ने प्रो. सीएम सिंह को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी है और विश्वास व्यक्त किया है कि उनके नेतृत्व में ईएफआई ‘इलाज के साथ-साथ बीमारी की रोकथाम’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और देश में सबूत-आधारित जन स्वास्थ्य को मजबूत करेगा।