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मधुबाला: हिंदी सिनेमा की अमर अदाकारा की पुण्यतिथि

मधुबाला, जिन्हें हिंदी सिनेमा की 'वीनस' कहा जाता है, आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं। 23 फरवरी को उनकी पुण्यतिथि है। जानें उनके जीवन, अदाकारी और अनकही कहानियों के बारे में। उनकी खूबसूरती और मासूमियत ने उन्हें अमर बना दिया। उनके फिल्मी सफर की कुछ यादगार बातें और अंतिम दिनों की कहानी भी जानें।
 

मधुबाला की यादें


मुंबई: मधुबाला, जिन्हें हिंदी सिनेमा की 'वीनस' कहा जाता है, आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं। 23 फरवरी को उनकी पुण्यतिथि है, जब 1969 में मात्र 36 वर्ष की आयु में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा। उनकी खूबसूरती, मासूमियत और अदाकारी ने उन्हें अमर बना दिया। उनका असली नाम मुमताज जहां बेगम देहलवी था, और उनका जन्म 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में एक साधारण परिवार में हुआ। बचपन से ही उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा और बाल कलाकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत की।


सच्चे प्यार की तलाश

1940 के दशक में 'महारथी कार्ण' और 'नील कमल' जैसी फिल्मों से उन्हें पहचान मिली। लेकिन असली प्रसिद्धि 1949 की 'महल' से मिली, जिसमें उनकी रहस्यमयी और आकर्षक छवि ने दर्शकों को दीवाना बना दिया। उनकी कुछ सबसे यादगार फिल्में 'मुगल-ए-आजम' और 'चलती का नाम गाड़ी' हैं।


मधुबाला के अनजाने पहलू

'मुगल-ए-आजम' में अनारकली के किरदार में मधुबाला ने ऐसा जादू बिखेरा कि आज भी 'प्यार किया तो डरना क्या' गाना दिलों को छूता है। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान एक मजेदार किस्सा भी जुड़ा है। एक गंभीर सीन में मधुबाला को भावुक रहना था, लेकिन उनकी खुशमिजाज स्वभाव के कारण वे बार-बार हंस पड़ती थीं। नतीजतन, निर्देशक के. आसिफ को उस सीन की शूटिंग 7 दिनों तक रोकनी पड़ी। यह उनकी मासूमियत और शोख अदा का प्रमाण था।


आखिरी दिन

मधुबाला ने कॉमेडी, रोमांस, ड्रामा और ऐतिहासिक फिल्मों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 'चलती का नाम गाड़ी' में उनकी चुलबुली अदा और 'महबूब की मेहंदी' जैसी फिल्मों में भावुकता ने उन्हें हर तरह के रोल में सिद्ध किया। उन्हें 'हिंदी सिनेमा की वीनस' या 'बॉलीवुड की मारिलिन मुनरो' कहा जाता था। उनकी मुस्कान और आंखों की चमक दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती थी। लेकिन उनकी जिंदगी दर्द से भरी रही। बचपन से ही उन्हें दिल की गंभीर बीमारी (वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट) थी, जिससे उन्हें सांस फूलने और खून की उल्टी जैसी समस्याएं होती थीं। अंतिम वर्षों में वे बिस्तर पर ही रहने लगीं और काफी कमजोर हो गईं।


अंतिम विदाई

उन्होंने कई बार कहा, 'मुझे मरना नहीं है।' 1960 में उन्होंने अभिनेता-गायक किशोर कुमार से विवाह किया, लेकिन बीमारी के कारण उनका वैवाहिक जीवन भी कठिनाइयों से भरा रहा। 22 फरवरी 1969 की रात दिल का दौरा पड़ने के बाद, अगले दिन 23 फरवरी को सुबह उनका निधन हो गया। मधुबाला का फिल्मी सफर भले ही छोटा था, लेकिन उनकी विरासत अमर है। आज भी उनकी फिल्में देखकर नई पीढ़ी उनकी प्रशंसा करती है।