मुंबई में डेढ़ साल की बच्ची की हत्या का मामला: पड़ोसी पर आरोप
घटना का विवरण
मुंबई: गोरेगांव में एक डेढ़ साल की बच्ची की छठी मंजिल से गिरकर मौत के मामले में पुलिस ने एक सप्ताह बाद हत्या का मामला दर्ज किया है। बच्ची की मां ने 10 साल की पड़ोसी पर आरोप लगाया है कि उसने बच्ची को खुले डक्ट में धकेल दिया। पुलिस के अनुसार, CCTV फुटेज में नाबालिग लड़की बच्ची को उठाकर रेलिंग के पास ले जाती और उसे नीचे धकेलती नजर आ रही है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होगी।
घटना का समय और स्थान
यह घटना 14 अक्टूबर की रात को गोरेगांव ईस्ट की शिवशाही बिल्डिंग में हुई। प्रारंभ में पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया था, लेकिन CCTV फुटेज और परिवार की शिकायत के आधार पर हत्या की FIR दर्ज की गई।
बच्ची की लापता होने की कहानी
बिल्ली के साथ खेल रही थी बच्ची, अचानक हुई लापता
परिवार के अनुसार, 18 महीने की बच्ची रात लगभग 9 से 9:30 बजे के बीच अपने घर के बाहर कॉमन कॉरिडोर में एक बिल्ली के साथ खेल रही थी। कुछ समय बाद जब वह नजर नहीं आई, तो उसकी मां ने अपने 12 साल के बेटे को उसे खोजने के लिए भेजा।
बच्चे ने आसपास खोजा लेकिन वह नहीं मिली। फिर उसने सीढ़ियों के पास खुले डक्ट में देखा, जहां उसे अपनी बहन जैसे कपड़े पहने एक बच्ची पड़ी हुई दिखाई दी। उसने तुरंत अपनी मां को इसकी सूचना दी। सोसायटी के लोग घायल बच्ची को अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मां का बयान
मां बोलीं- साढ़े तीन फीट ऊंची रेलिंग से खुद गिरना मुश्किल
बच्ची की मां ने पुलिस को बताया कि छठी मंजिल पर रेलिंग लगभग साढ़े तीन फीट ऊंची है। उनका कहना है कि इतनी छोटी बच्ची का अपने आप रेलिंग पार करके नीचे गिरना संभव नहीं है। मां का आरोप है कि CCTV फुटेज में पड़ोसी बच्ची पहले उनकी बेटी को इशारे से लिफ्ट के पास बुलाती है और फिर उसे गोद में उठाकर खुले डक्ट में धकेल देती है।
आरोपी का परिवार
दो हफ्ते पहले ही सोसायटी में रहने आया था परिवार
रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी बताई जा रही 10 वर्षीय बच्ची का परिवार घटना से लगभग दो हफ्ते पहले ही सोसायटी में रहने आया था। घटना के बाद उनका परिवार वहां से चला गया और रिश्तेदारों के साथ रहने लगा। मृत बच्ची के परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि नाबालिग के परिजनों ने घटना को छिपाने के लिए सोसायटी के CCTV कैमरे बंद कर दिए थे। पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की कार्रवाई
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने काउंसलिंग के निर्देश दिए
पुलिस ने नाबालिग बच्ची को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया। रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड ने उसकी काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए और उसे माता-पिता की देखरेख में छोड़ दिया। इस मामले में नाबालिग की उम्र को देखते हुए कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। भारतीय कानून के अनुसार, सात साल से कम उम्र के बच्चे को किसी अपराध के लिए आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
इसलिए हत्या की FIR दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं या नाबालिग को दोषी ठहराया गया है। पुलिस की जांच और लागू बाल न्याय कानून के तहत आगे की प्रक्रिया के बाद ही मामले में अंतिम निष्कर्ष निकलेगा।