मोतीलाल राजवंश: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता की अनकही कहानी
‘देवदास’ में चुन्नीबाबू का यादगार किरदार
मोतीलाल राजवंश, एक ऐसा नाम जो हिंदी सिनेमा में अपनी अनोखी पहचान बनाने में सफल रहे। उन्होंने लगभग तीन दशकों तक फिल्म उद्योग में काम किया और इस दौरान करीब 60 फिल्मों में अभिनय किया। मोतीलाल ने स्वाभाविक अभिनय और मेथड एक्टिंग की नई परिभाषा दी। उन्हें सबसे ज्यादा पहचान फिल्म 'देवदास' में चुन्नीबाबू के किरदार से मिली।
फिल्मफेयर पुरस्कार की पहली जीत
फिल्म 'देवदास' के लिए मोतीलाल ने फिल्मफेयर पुरस्कार जीता, जो कि इस पुरस्कार का पहला सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का खिताब था। यह उपलब्धि उन्हें 1955 में मिली।
आर्मी में भर्ती होने का सपना
मोतीलाल का सपना था कि वे आर्मी में भर्ती हों, जिसके लिए वे मुंबई आए थे। लेकिन किस्मत ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री की ओर मोड़ दिया। 1940 में आई फिल्म 'अछूत' में उनके द्वारा निभाए गए किरदार को महात्मा गांधी और सरदार पटेल ने भी सराहा।
बीमारी के कारण नहीं दे पाए टेस्ट
जब मोतीलाल आर्मी में शामिल होने के लिए मुंबई आए, तब वे अचानक बीमार पड़ गए और टेस्ट नहीं दे पाए। एक बार जब वे एक फिल्म की शूटिंग देखने गए, तो निर्देशक केपी घोष ने उन्हें देखा और 'शहर का जादू' फिल्म में काम करने का प्रस्ताव दिया।
अफेयर की चर्चा
मोतीलाल की बिंदास लाइफस्टाइल के कारण उनका नाम कई अभिनेत्रियों के साथ जुड़ा। उनमें से एक शोभना समर्थ और दूसरी नादिरा थीं। नादिरा के साथ उनका रिश्ता रहा, लेकिन शादी नहीं हुई। इसके बाद मोतीलाल शोभना समर्थ के प्रति आकर्षित हुए, जो पहले से शादीशुदा थीं। उनका रिश्ता काफी चर्चित रहा। मोतीलाल का निधन 17 जून 1965 को स्वास्थ्य कारणों से हुआ।