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मोहम्मद रफी का सदाबहार गीत 'सर जो तेरा चकराए' आज भी है लोकप्रिय

मोहम्मद रफी का गाया हुआ गीत 'सर जो तेरा चकराए' 69 साल बाद भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। यह गाना न केवल अपनी मधुर आवाज के लिए, बल्कि इसके मजेदार बोल और अदाकारी के लिए भी जाना जाता है। जानें इस गीत की उत्पत्ति, इसके पीछे की कहानी और कैसे यह आज भी नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बना हुआ है।
 

मोहम्मद रफी का अमर गीत


हिंदी सिनेमा के गीत: जब भी हिंदी सिनेमा के क्लासिक गानों की चर्चा होती है, मोहम्मद रफी का नाम अवश्य आता है। उनका गाया हुआ 69 साल पुराना प्रसिद्ध गीत 'सर जो तेरा चकराए' आज भी उतना ही प्रिय है जितना कि इसके रिलीज के समय था। समय के साथ, यह गाना 'चंपी सॉन्ग' के नाम से मशहूर हो गया और कई विज्ञापनों में इसकी धुन का उपयोग किया गया है।


यह गीत 1957 में आई फिल्म 'प्यासा' का हिस्सा था, जिसमें इसे अभिनेता जॉनी वॉकर पर फिल्माया गया था। जॉनी वॉकर ने अपनी अदाकारी और कॉमिक टाइमिंग से इस गाने को यादगार बना दिया। इसके बोल प्रसिद्ध शायर साहिर लुधियानवी ने लिखे थे, जबकि संगीत एस.डी. बर्मन ने दिया था। मोहम्मद रफी की मधुर आवाज ने इसे अमर बना दिया।


गीत की शुरुआत इस पंक्ति से होती है: 'सर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए, आजा प्यारे पास हमारे, काहे घबराए...'। यह गाना सिर की मालिश के फायदों को मजेदार तरीके से बताता है, जिससे यह लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया। यही कारण है कि इसे बाद में कई हेयर ऑयल और हेड मसाज से जुड़े विज्ञापनों में शामिल किया गया। धीरे-धीरे, यह गाना 'चंपी सॉन्ग' के नाम से जाना जाने लगा।


आज के डिजिटल युग में भी, यह गाना सोशल मीडिया, रील्स और पुराने फिल्मी गानों की प्लेलिस्ट में लगातार सुना जा रहा है। नई पीढ़ी भी इसे उसी उत्साह से पसंद कर रही है, जैसे कि दशकों पहले दर्शकों ने इसे अपनाया था। यह किसी कालजयी गीत की पहचान है कि समय के साथ उसकी लोकप्रियता में कमी नहीं आती। मोहम्मद रफी की यह धरोहर भारतीय फिल्म संगीत के स्वर्णिम युग की एक अनमोल कड़ी मानी जाती है। बेहतरीन गायकी, शानदार संगीत और हास्य से भरपूर प्रस्तुति के कारण 'सर जो तेरा चकराए' आज भी हर उम्र के श्रोताओं के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए है।