राकेश बेदी ने बॉलीवुड में भेदभाव और स्टारडम के बदलाव पर की चर्चा
राकेश बेदी ने हाल ही में बॉलीवुड में भेदभाव और स्टारडम के बदलते स्वरूप पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जब उन्हें फिल्म की शूटिंग के दौरान पैसे की आवश्यकता थी, लेकिन प्रोड्यूसर ने कहा कि पैसे हीरो के लिए रिजर्व हैं। बेदी ने इंडस्ट्री की हायरार्की को उजागर करते हुए बताया कि कैसे छोटे कलाकारों की जरूरतों को बड़े सितारों की सुख-सुविधाओं से नीचे रखा जाता है। इसके अलावा, उन्होंने स्टारडम के बदलते पैमाने और डिजिटल युग में शोहरत के नए मानदंडों पर भी चर्चा की।
Apr 20, 2026, 12:34 IST
बॉलीवुड के बदलते स्वरूप पर राकेश बेदी की राय
दिग्गज अभिनेता राकेश बेदी, जिन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग और बेहतरीन अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है, ने हाल ही में बॉलीवुड के अंदरूनी कामकाज और स्टारडम के बदलते स्वरूप पर खुलकर चर्चा की। 'धुरंधर' वेब सीरीज में पाकिस्तानी राजनेता जमील जमाली का किरदार निभाने वाले बेदी ने अपने शुरुआती करियर का एक ऐसा किस्सा साझा किया, जो इंडस्ट्री में कलाकारों के बीच भेदभाव को उजागर करता है। उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जब उन्हें एक फिल्म की शूटिंग के दौरान तुरंत पैसे की आवश्यकता थी। जब उन्होंने प्रोड्यूसर से अपना पेमेंट मांगा, तो उन्हें बताया गया कि पैसे फिल्म के हीरो के लिए रिजर्व हैं। इस घटना ने उन्हें इंडस्ट्री की हायरार्की को समझने में मदद की, जहाँ जाने-माने सितारों को विशेष ट्रीटमेंट दिया जाता है।
जब प्रोड्यूसर ने कहा- "पैसे हैं, पर तुम्हारे लिए नहीं"
जब प्रोड्यूसर ने कहा- "पैसे हैं, पर तुम्हारे लिए नहीं"
एक इंटरव्यू में राकेश बेदी ने उस समय को याद किया जब वह आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे। उन्होंने बताया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें अपनी किश्त चुकाने के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी। बेदी ने कहा कि सेट पर प्रोड्यूसर पैसे के पैकेट के साथ आया। जब उन्होंने अपनी बकाया राशि मांगी, तो प्रोड्यूसर ने साफ तौर पर कहा कि पैसे नहीं हैं। जब बेदी ने पैकेट की ओर इशारा किया, तो प्रोड्यूसर ने जवाब दिया कि 'यह पैसे हीरो को देने के लिए हैं।' इस घटना ने बेदी को यह अहसास कराया कि इंडस्ट्री में एक सख्त हायरार्की है, जहाँ छोटे या सपोर्टिंग एक्टर्स की जरूरतों को बड़े सितारों की सुख-सुविधाओं से नीचे रखा जाता है।
स्टारडम का पैमाना शेयर बाजार जैसा
शेयर बाजार जैसा है स्टारडम
इंडस्ट्री में 'इक्विटी' और सम्मान पर चर्चा करते हुए बेदी ने एक दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि किसी कलाकार का स्टेटस शेयर बाजार की तरह होता है; जैसे एक शेयर की कीमत ₹10 से ₹1000 तक जा सकती है, वैसे ही सफलता मिलने पर लोगों का नजरिया रातों-रात बदल जाता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चाहे रुतबा कितना भी बड़ा हो, किसी के साथ बुरा बर्ताव या बेइज्जती करना गलत है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत सिद्धांत को साझा करते हुए कहा कि वह आज भी किसी ड्रेस-मैन से अपने जूते पहनने में मदद नहीं मांगते, क्योंकि वह हर इंसान की गरिमा का सम्मान करते हैं।
बदल गया है शोहरत का पैमाना
बदल गया है शोहरत का पैमाना
राकेश बेदी ने 'ये जो है जिंदगी', 'श्रीमान श्रीमती' और 'चश्मे बद्दूर' जैसे क्लासिक्स के दौर की तुलना आज के समय से की। पहले कलाकार एक मैगजीन में अपना नाम छपने पर खुश होते थे, जबकि आज एक छोटी सी बातचीत या वीडियो मिनटों में लाखों लोगों तक पहुँच जाता है। उन्होंने माना कि आज स्टारडम का पैमाना बहुत बड़ा हो गया है, और वह खुद को इस डिजिटल युग की तुरंत मिलने वाली शोहरत के साथ ढालने की कोशिश कर रहे हैं।