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रामायण फिल्म का ट्रेलर: ब्रह्म मुहूर्त में लॉन्च का रहस्य क्या है?

नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' का ट्रेलर हाल ही में ब्रह्म मुहूर्त में जारी किया गया, जो दर्शकों द्वारा सराहा गया है। इस विशेष समय के चयन के पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। जानें ब्रह्म मुहूर्त का क्या अर्थ है और क्यों इसे शुभ माना जाता है। इस लेख में हम इस पावन समय के लाभ और इसके सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा करेंगे।
 

रामायण का ट्रेलर हुआ जारी


नई दिल्ली: नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित फिल्म 'रामायण' का शानदार ट्रेलर हाल ही में रिलीज किया गया है। दर्शकों ने इसे काफी पसंद किया है, लेकिन इसके लॉन्च के समय को लेकर सबसे अधिक चर्चा हो रही है। निर्माताओं ने इस बहुप्रतीक्षित ट्रेलर को तड़के 'ब्रह्म मुहूर्त' में पेश किया, जिसके बाद से इंटरनेट पर यह सवाल तेजी से वायरल हो गया है कि आखिर इस विशेष समय का चयन क्यों किया गया?


ब्रह्म मुहूर्त का महत्व

ब्रह्म मुहूर्त और सूर्यवंशी परंपरा का विशेष योग


सनातन परंपरा में ब्रह्म मुहूर्त का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, सूर्योदय से पहले का यह समय केवल एक साधारण समय नहीं है, बल्कि इसे 'ईश्वरीय समय' माना जाता है। मान्यता है कि इस समय में कोई भी कार्य आरंभ करने से व्यक्ति को सूर्य देव की ऊर्जा और प्रसिद्धि प्राप्त होती है। चूंकि भगवान श्रीराम सूर्यवंशी थे, इसलिए इस पौराणिक कथा पर आधारित फिल्म का प्रचार इस समय में करना आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इसके अलावा, पवित्र सावन मास की शुरुआत में इसे जारी करने से इसका महत्व और बढ़ गया है।


ब्रह्म मुहूर्त क्या है?

क्या होता है ब्रह्म मुहूर्त?


शास्त्रों के अनुसार, 'ब्रह्म' का अर्थ परमात्मा या परम ज्ञान है और 'मुहूर्त' का अर्थ समय है। इस प्रकार, ब्रह्म मुहूर्त का अर्थ 'परमात्मा का समय' है। यह समय प्रतिदिन सूर्योदय से 1 घंटा 36 मिनट पहले शुरू होता है और 48 मिनट तक रहता है। सामान्यतः इसे सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे के बीच का समय माना जाता है।


सकारात्मक ऊर्जा का चरम

सकारात्मक ऊर्जा का चरम और अद्भुत लाभ


धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त के दौरान पूरे ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा अपने उच्चतम स्तर पर होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस पावन समय में शुरू किया गया कोई भी शुभ कार्य या अनुष्ठान कभी निष्फल नहीं होता। यह समय ईश्वर की आराधना, ध्यान, योग, अध्ययन और नए कार्यों की शुरुआत के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। यही कारण है कि निर्माताओं ने इस सांस्कृतिक महाकाव्य के आगाज के लिए इस दिव्य समय का चयन किया।