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रामायण फिल्म में एआर रहमान का संगीत: एक अनोखी यात्रा

नितेश तिवारी की 'रामायण' फिल्म का दर्शकों को बेसब्री से इंतज़ार है। इस फिल्म में एआर रहमान ने संगीत तैयार किया है, जिसमें उन्होंने विविधता और ज्ञान के महत्व पर जोर दिया है। जानें एआर रहमान का इस महाकाव्य पर काम करने का अनुभव और उनके विचार।
 

रामायण का इंतज़ार


नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित 'रामायण' की घोषणा के बाद से दर्शक इसकी रिलीज़ का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। इस महाकाव्य फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता और यश रावण की भूमिका में नजर आएंगे। इसके अलावा, सनी देओल और रवि दुबे भी इस फिल्म का हिस्सा होंगे। इस फिल्म की एक विशेषता यह है कि इसके संगीत के लिए एआर रहमान ने प्रसिद्ध संगीतकार हंस ज़िमर के साथ सहयोग किया है। हाल ही में, एआर रहमान ने इस सहयोग के बारे में अपने विचार साझा किए।


एआर रहमान का अनुभव

एआर रहमान, जो एक प्रसिद्ध गायक और संगीतकार हैं, ने हाल ही में एक साक्षात्कार में 'रामायण' के संगीत पर काम करने का अनुभव साझा किया। उन्होंने इस बात पर भी चर्चा की कि एक मुस्लिम होते हुए भी हिंदू महाकाव्य पर आधारित फिल्म के लिए संगीत तैयार करना उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है। रहमान ने यह भी बताया कि वह नए विचारों और मूल्यों का कितना सम्मान करते हैं।


शिक्षा और अनुभव

“मैंने एक ब्राह्मण स्कूल में पढ़ाई की”
बीबीसी के साथ बातचीत में, एआर रहमान ने कहा, “मैंने एक ब्राह्मण स्कूल में पढ़ाई की, जहाँ हर साल रामायण और महाभारत का अध्ययन किया जाता था। इसीलिए मुझे इन कहानियों का गहरा ज्ञान है। इस फिल्म की कहानी एक अच्छे इंसान, उनके चरित्र और ऊँचे आदर्शों के बारे में है। लोग इस पर बहस कर सकते हैं, लेकिन मैं इन सभी सकारात्मक चीज़ों को महत्व देता हूँ जिनसे मैं सीख सकता हूँ।”


विविधता का सम्मान

“मैं मुस्लिम हूँ और रामायण हिंदू है”
एआर रहमान ने लोगों से अपील की कि वे व्यापक दृष्टिकोण अपनाएं और कहा, “हमें छोटी सोच और स्वार्थ से ऊपर उठना चाहिए। जब हम इससे ऊपर उठते हैं, तो हम चमकते हैं, और यह बहुत महत्वपूर्ण है। हंस ज़िमर यहूदी हैं, मैं मुस्लिम हूँ, और रामायण हिंदू है। यह फिल्म भारत से पूरी दुनिया में प्रेम के साथ प्रस्तुत की जा रही है।”


ज्ञान का महत्व

एआर रहमान ने यह भी कहा कि हमें हर चीज़ से अच्छी बातें सीखनी चाहिए। उन्होंने कहा, "पैगंबर ने भी कहा था कि ज्ञान बहुत कीमती है; इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप इसे कहाँ से सीखते हैं, चाहे वह कोई भिखारी हो, राजा हो, नेता हो, या किसी के गलत या सही काम हों। ज्ञान एक ऐसी चीज़ है जिसका कोई मोल नहीं लगाया जा सकता। हमें हर जगह से सीखना चाहिए।"