लता मंगेशकर का अमर गाना: प्रेम रोग का भावुक गीत
विधवा पर आधारित फिल्म का विरोध
Prem Rog Songs, मुंबई: 80 और 90 के दशक में हिंदी सिनेमा के संगीत में एक नया रंग देखने को मिला। इस समय संगीतकारों ने गानों में प्रयोग करने से हिचकिचाए नहीं। कहीं हिप-हॉप का जादू था, तो कहीं रोमांस की बारिश में दर्शक भीग रहे थे। इसी दौरान लता मंगेशकर का एक ऐसा गाना आया जिसने सभी को भावुक कर दिया।
वो गाना जिसने पूरे देश को रुलाया
80 और 90 के दशक में कई ऐसे इमोशनल गाने आए, जो जिंदादिली से भरे थे, लेकिन उनमें भावनाओं का ऐसा मिश्रण था कि हर कोई रो पड़ा। इनमें से एक गाना था, जो 1982 में आई फिल्म प्रेम रोग का था: 'ये गलियां ये चौबारा'।
आज भी लोगों की आंखें नम कर देता है
ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे पर फिल्माया गया यह गाना आज भी सुनकर लोगों की आंखों में आंसू ला देता है। यह गाना उस समय फिल्म में आता है जब मनोरमा की शादी हो रही होती है और वह अपने मायके को छोड़कर ससुराल जाने की तैयारी कर रही होती है।
बिदाई के इस गाने को सुनकर हर माता-पिता का दिल बैठ जाता है। कहा जाता है कि जब लोगों ने इसे सुना, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए थे और आज भी यह गाना सुनकर लोग भावुक हो जाते हैं।
लता मंगेशकर की आवाज ने गाने को अमर बना दिया
इस गाने को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। उनकी आवाज इस गाने के लिए एकदम उपयुक्त थी। लता दीदी ने अपने करियर में कई सुरीले और इमोशनल गाने गाए हैं, जिनमें प्यार और दिल के दर्द का एहसास होता है।
संतोष आनंद ने लिखा था गाना
इसी कारण लता दीदी की आवाज में गाया यह गाना अमर हो गया। इसे संतोष आनंद ने लिखा था और संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया था। इस तिकड़ी ने इस गाने को हमेशा के लिए ब्लॉकबस्टर बना दिया।
विधवाओं के विवाह पर आधारित थी फिल्म
फिल्म 'प्रेम रोग' का निर्देशन राज कपूर ने किया था। यह फिल्म एक बोल्ड विषय पर आधारित थी, जिसमें विधवाओं के विवाह पर लगने वाली पाबंदी को दर्शाया गया था। फिल्म में एक विधवा को अपनी ससुराल में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस विषय पर विवाद भी हुआ, लेकिन राज कपूर का यह प्रयोग सफल रहा और फिल्म को दर्शकों ने खूब सराहा।