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विनोद खन्ना: हिंदी सिनेमा के रोमांटिक हीरो का जादू

विनोद खन्ना, हिंदी सिनेमा के सबसे आकर्षक अभिनेताओं में से एक, आज अपने जन्मदिन पर याद किए जा रहे हैं। उनकी लंबाई, व्यक्तित्व और मुस्कान ने उन्हें एक रोमांटिक हीरो के रूप में स्थापित किया। जानें कैसे एक गाने ने उनकी छवि को बदल दिया और कैसे उन्होंने अमिताभ बच्चन को चुनौती दी। इस लेख में उनके करियर के उतार-चढ़ाव और फिल्म 'दोस्ताना' से जुड़ी दिलचस्प कहानियाँ भी शामिल हैं।
 

विनोद खन्ना का जन्मदिन


विनोद खन्ना का जन्मदिन: हिंदी फिल्म उद्योग में विनोद खन्ना को सबसे आकर्षक अभिनेताओं में से एक माना जाता है। उनकी लंबाई, प्रभावशाली व्यक्तित्व, आकर्षक चेहरा और मुस्कान उन्हें अन्य कलाकारों से अलग बनाती थी। आज उन्हें न केवल एक उत्कृष्ट अभिनेता के रूप में, बल्कि एक रोमांटिक हीरो के तौर पर भी याद किया जाता है। हालांकि, उनके करियर की शुरुआत में फिल्म इंडस्ट्री उन्हें इस छवि में देखने के लिए तैयार नहीं थी।


फिल्मों में लगातार काम

विनोद खन्ना ने कई सफल फिल्मों में काम किया, लेकिन उस समय की फिल्म निर्माता उन्हें रोमांटिक हीरो के रूप में नहीं देख पा रहे थे। फिर एक फिल्म आई, जो बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन उसके एक गाने ने उनकी स्क्रीन इमेज को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


एक गाने ने बदल दी सोच

आरडी बर्मन के संगीत से सजी एक गाने ने विनोद खन्ना के करियर में एक नया मोड़ लाया। यह गाना 1972 में रिलीज़ हुई फिल्म 'परछाइयां' का है। 'सांसों में कभी' गाने को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने गाया था।


हालांकि फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों में लाने में सफल नहीं रही, लेकिन इस गाने में विनोद खन्ना का रोमांटिक अंदाज दर्शकों को भा गया। इसके बाद फिल्म इंडस्ट्री में उनके व्यक्तित्व को एक नए दृष्टिकोण से देखा जाने लगा। धीरे-धीरे उनकी छवि एक ऐसे अभिनेता की बनने लगी, जो एक्शन और गंभीर भूमिकाओं के साथ-साथ रोमांटिक किरदार भी बखूबी निभा सकता है।


अमिताभ बच्चन को चुनौती

विनोद खन्ना का स्टारडम 1970 के अंत और 1980 के प्रारंभ में तेजी से बढ़ा। उनकी कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। 'इंकार', 'अमर अकबर एंथनी', 'कुर्बानी', 'लहू के दो रंग', 'जेल यात्रा' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने सराहा। इस समय अमिताभ बच्चन भी हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल थे। माना जाता है कि यदि विनोद खन्ना ने अपने करियर से ब्रेक नहीं लिया होता, तो उनका स्टारडम अमिताभ बच्चन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता था।


फिल्म 'दोस्ताना' का दिलचस्प किस्सा

विनोद खन्ना और अमिताभ बच्चन से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा फिल्म 'दोस्ताना' से भी जुड़ा है। कहा जाता है कि निर्देशक राज खोसला ने पहले विनोद खन्ना को शत्रुघ्न सिन्हा की भूमिका के लिए चुना था, लेकिन बाद में यह भूमिका शत्रुघ्न सिन्हा को मिली। मेकर्स को लगा कि अगर फिल्म में अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना दोनों होंगे, तो जीनत अमान का विनोद खन्ना को छोड़कर अमिताभ के किरदार को चुनना दर्शकों के लिए स्वाभाविक नहीं होगा।


यह किस्सा उस समय विनोद खन्ना की लोकप्रियता और स्टारडम को दर्शाता है। उनका करियर भले ही उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन हिंदी सिनेमा में उनकी खास पहचान आज भी बनी हुई है।