शोले: अमजद खान का गब्बर और उसके आइकॉनिक डायलॉग्स
70 के दशक की सुपरहिट फिल्म शोले
1975 में रिलीज हुई फिल्म शोले आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हुई है। इस फिल्म के संवाद आज भी लोगों की जुबान पर हैं। शोले के हर किरदार ने फिल्म में अद्भुत जान डाल दी। खासकर गब्बर का किरदार निभाने वाले अमजद खान ने इस फिल्म में एक अनोखी छाप छोड़ी। उनके पिता जयंत ने एक बार उन्हें सलाह दी थी, 'अगर नकल करनी है, तो आम लोगों की करो, खास लोगों की नहीं।'
अमजद खान का करियर और शोले की सफलता
जब शोले रिलीज हुई, तो यह एक बड़ी हिट साबित हुई। रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने अमजद खान को रातोंरात स्टार बना दिया। गब्बर का किरदार आज भी सिनेमा में अमर है।
गब्बर के यादगार डायलॉग्स
"कितने आदमी थे?"
"जो डर गया, समझो मर गया।"
"बहुत याराना लगता है।"
"ये हाथ हमको दे दे ठाकुर।"
"तेरा क्या होगा कालिया?"
"अरे ओ सांभा।"
"जब तक तेरे पैर चलेंगे, उसकी सांस चलेगी। तेरे पैर रुक, तो बंदूक चलेगी।"
पिता की सलाह का प्रभाव
शोले के डायलॉग्स आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। इनमें से एक डायलॉग धोबी से प्रेरित था, जैसा कि अमजद की पत्नी ने बताया।
धोबी से प्रेरित डायलॉग
रोशमिला भट्टाचार्य की किताब 'Bollywood's Iconic Villains Bad Men' के अनुसार, अमजद की पत्नी शहला ने बताया कि उनके ससुर ने अमजद को सलाह दी थी कि खास लोगों की नकल करने से पहचाने जाओगे। इस सलाह ने अमजद को प्रेरित किया। शहला ने कहा, "हमारे पास एक धोबी था जो अपनी पत्नी को पुकारता था, 'अरे ओ शांति', और इसी से 'अरे ओ सांभा' डायलॉग निकला।" शोले के गब्बर के डायलॉग्स आज भी लोगों को याद हैं।