संजय कपूर की संपत्ति विवाद में नया मोड़: कोर्ट ने वसीयत की जांच की अनुमति दी
संजय कपूर की विरासत पर विवाद गहराया
मुंबई: बॉलीवुड और व्यापार जगत में चल रही विरासत की लड़ाई में एक नया मोड़ आया है। दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की लगभग 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर उनके परिवार के सदस्यों के बीच विवाद बढ़ गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनकी वसीयत की फोरेंसिक और हैंडराइटिंग जांच की अनुमति दी है। यह निर्णय 26 फरवरी 2026 को जॉइंट रजिस्ट्रार गगनदीप जिंदल द्वारा सुनाया गया, जिससे करिश्मा कपूर के बच्चों और संजय की मां रानी कपूर को महत्वपूर्ण राहत मिली है।
वसीयत की जांच की तारीख तय
संजय कपूर की संपत्ति विवाद में नया ट्विस्ट
संजय कपूर की मृत्यु के बाद, उनकी तीसरी पत्नी प्रिया कपूर ने दावा किया कि वसीयत में सभी संपत्तियां उन्हें और उनके बेटे को दी गई हैं। हालांकि, संजय की पहली पत्नी करिश्मा कपूर के बच्चे समायरा और कियान, साथ ही उनकी मां रानी कपूर ने वसीयत की वैधता पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वसीयत में धोखाधड़ी की गई है और यह फर्जी है। वसीयत को कोर्ट के रजिस्ट्रार में सील कवर में रखा गया है।
कोर्ट के आदेश के अनुसार, 10 मार्च 2026 को दोपहर 3 बजे मूल वसीयत की जांच की जाएगी। करिश्मा, रानी और उनके वकील, साथ ही फोरेंसिक और हैंडराइटिंग विशेषज्ञ भी उपस्थित रहेंगे। प्रिया कपूर के वकील को भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। यदि प्रिया का वकील नहीं आता है, तो जांच बिना उनके जारी रहेगी। हालांकि, जांच के दौरान वसीयत की कोई फोटो या कॉपी नहीं बनाई जा सकेगी।
सुनवाई में करिश्मा के वकील ने कहा कि वसीयत की कॉपी पहले ही मिल चुकी है, लेकिन असली दस्तावेज की जांच आवश्यक है ताकि सत्यता स्थापित की जा सके। कोर्ट ने प्रिया की आपत्तियों को खारिज कर दिया और जांच की अनुमति दी। यह निर्णय करिश्मा के बच्चों और रानी कपूर के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। संजय कपूर एक प्रमुख व्यवसायी थे, जिनकी कंपनी सोना कॉमस्टार में हिस्सेदारी थी। उनकी मृत्यु के बाद परिवार में संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हुआ। प्रिया कपूर खुद को मुख्य वारिस मानती हैं, जबकि करिश्मा के बच्चे और रानी कपूर हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं।