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सनी देओल की 'बंटवारा 1947': दर्शकों की प्रतिक्रियाएं और फिल्म की समीक्षा

सनी देओल की नई फिल्म 'बंटवारा 1947' ने दर्शकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं प्राप्त की हैं। फिल्म की शुरुआत धीमी होने के बावजूद, दूसरे भाग में भावनात्मक क्षणों ने दर्शकों को प्रभावित किया। जानें कि दर्शकों ने फिल्म के बारे में क्या कहा और इसके मुख्य पात्रों की अदाकारी की कैसी सराहना की गई।
 

सनी देओल की फिल्म 'बंटवारा 1947' का रिव्यू


सनी देओल की 'बंटवारा 1947' का रिव्यू: हाल ही में सनी देओल की नई फिल्म 'बंटवारा 1947' सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। दर्शकों ने पहले दिन के पहले शो के बाद अपनी राय सोशल मीडिया पर साझा की है। यह फिल्म 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की कहानी पर आधारित है और इसे राजकुमार संतोषी ने निर्देशित किया है। फिल्म में सनी देओल के साथ प्रीति जिंटा, अली फजल और शबाना आजमी भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।


'बंटवारा 1947' पर दर्शकों की राय

कई दर्शकों ने बताया कि फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी थी। पहले भाग में कहानी का विकास धीरे-धीरे होता है और कुछ पात्रों के किरदार कमजोर प्रतीत होते हैं। हालांकि, दूसरे भाग ने पूरी फिल्म का रंग बदल दिया। इस हिस्से में भावनात्मक क्षण इतने प्रभावशाली हैं कि दर्शक खुद को कहानी से जोड़ लेते हैं। कई लोगों ने कहा कि फिल्म खत्म होने के बाद भी उसके दृश्य उनके मन में घूमते रहे।


Shabana Azmi turns Mai into the emotional memory of #Batwara1947. Her stubbornness, humour and pain make her feel real rather than symbolic. What a performance. #Batwara #Batwara1947Review ❤️👏


— स्वाति देशमुख (@sm_iconic) August 14, 2026


सनी देओल ने सिकंदर मिर्जा का किरदार निभाया है, जिसे दर्शकों ने सराहा। विशेष रूप से शबाना आजमी के साथ उनके रिश्ते को बहुत पसंद किया गया। शबाना आजमी 'माई' के रूप में नजर आती हैं, और सिकंदर का उन्हें मां की तरह समझने का सफर फिल्म का सबसे भावुक हिस्सा माना जा रहा है। एक दर्शक ने लिखा कि वे केवल सनी देओल के दमदार दृश्यों के लिए गए थे, लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाले पल शांत और दिल को छू लेने वाले थे।


“Mera ghar hai… main kahin nahi jaungi.” #ShabanaAzmi ko dekhkar ye thought baar-baar aaya ki ghar sirf chaar deewaar nahi hota.
Usmein memories hoti hain. Zindagi hoti hai. #Batwara1947 ka period drama scale HUGE hai
Aur Shabana Azmi… kya performance hai. She has… pic.twitter.com/3XPYotwaO0


— 𝐏𝐚𝐫𝐚𝐝𝐨𝐱 (@iParadox) August 14, 2026


कुछ दर्शकों ने बताया कि पहले भाग में सिकंदर और हमीदा के किरदार में कुछ कमियां थीं, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ी, ये पात्र दर्शकों के दिल के करीब आ गए। दूसरे भाग में कहानी का प्रभाव इतना गहरा है कि लोग फिल्म से जुड़ जाते हैं। कई लोगों ने कहा कि बंटवारे की पीड़ा को फिल्म ने संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया है।


Karan Deol ke dialogues sirf loud nahi, conviction ke saath delivered hain. #Batwara1947 gives him moments to prove that he can hold his own on the big screen. #Batwara #Batwara1947Review


— Miraaz Shergil (@Miraazshergil) August 14, 2026


कुल मिलाकर, 'बंटवारा 1947' को मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। शुरुआत में थोड़ी सुस्ती के बावजूद, दूसरे भाग ने दर्शकों का दिल जीतने में सफलता पाई है। सनी देओल और शबाना आजमी की केमिस्ट्री फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनी है। जो लोग ऐतिहासिक और भावनात्मक कहानियों के प्रशंसक हैं, वे इस फिल्म को देखने का मन बना सकते हैं।