×

समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट का जुर्माना: विवादों में घिरे कॉमेडियन

समय रैना, एक प्रसिद्ध स्टैंडअप कॉमेडियन, को सुप्रीम कोर्ट ने उनके शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में विवादास्पद मजाक के लिए 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला Cure SMA India Foundation द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि रैना ने दिव्यांग व्यक्तियों का मजाक उड़ाया। कोर्ट ने रैना को चेतावनी दी है कि यदि जुर्माना समय पर नहीं भरा गया, तो और कठोर कदम उठाए जाएंगे। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।
 

समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई


समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश: प्रसिद्ध स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना एक बार फिर विवादों में हैं। उनके लोकप्रिय शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि उन्हें दो हफ्तों के भीतर जमा करनी होगी, अन्यथा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।


मामले का विवरण

पिछले वर्ष, Cure SMA India Foundation ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि समय रैना और उनके शो में दिव्यांग व्यक्तियों, विशेषकर Spinal Muscular Atrophy से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाया गया। SMA एक गंभीर बीमारी है, जिसके इलाज में भारी खर्च होता है। फाउंडेशन का कहना है कि ऐसे मजाकों से इन मरीजों की भावनाओं को ठेस पहुंची है और समाज में संवेदनशीलता कम हुई है।


सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी समय रैना और अन्य कॉमेडियंस को चेतावनी दी थी। कोर्ट ने उन्हें माफी मांगने, जागरूकता फैलाने और दिव्यांगों के लिए फंडरेजिंग इवेंट्स आयोजित करने का निर्देश दिया था। लेकिन कोर्ट का मानना है कि समय रैना ने इन निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि उन्होंने कोर्ट को गुमराह किया है।


कोर्ट की सख्त चेतावनी

सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि युवा क्रिएटर्स को यह समझना चाहिए कि कानून और संवेदनशील मुद्दों का सम्मान करना आवश्यक है। समय रैना को यूथ आइकन माना जाता है, इसलिए उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जुर्माना समय पर नहीं भरा गया, तो और कठोर कदम उठाए जाएंगे।


याचिका में 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के होस्ट समय रैना और अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जैसे विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर द्वारा किए गए मजाक पर सवाल उठाए गए हैं।


विकलांग व्यक्तियों की गरिमा की रक्षा के लिए कड़े कानून की आवश्यकता पर जोर देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह विकलांग और दुर्लभ आनुवंशिक विकारों वाले लोगों का मजाक उड़ाने वाली अपमानजनक टिप्पणियों को SC-ST एक्ट की तर्ज पर दंडनीय अपराध बनाने के लिए कानून बनाने पर विचार करे।