सरकार ने E20 पेट्रोल के सुरक्षा मानकों पर दी जानकारी
E20 पेट्रोल के परीक्षण और सुरक्षा
नई दिल्ली - केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद में बताया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) को देशभर में लागू करने से पहले व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण और फील्ड ट्रायल किए गए थे। सरकार का दावा है कि ई20 पेट्रोल पुराने और नए वाहनों के लिए सुरक्षित है।
लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को नीति आयोग, ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी), और अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर लागू किया गया।
मंत्री ने बताया कि ई20 ईंधन के उपयोग से पहले एआरएआई, एसआईएएम, इंडियन ऑयल (आईओसीएल), और वाहन निर्माताओं ने प्रयोगशाला परीक्षण और फील्ड ट्रायल किए। इन परीक्षणों में इंजन की मजबूती, ड्राइविंग प्रदर्शन, और उत्सर्जन जैसे पहलुओं की जांच की गई। सरकार के अनुसार, सभी अध्ययनों ने पुष्टि की है कि ई20 पेट्रोल का उपयोग सुरक्षित है।
सरकार ने यह भी बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से ई15+ मिश्रित पेट्रोल और ई19-ई20 पेट्रोल का व्यापक उपयोग हो रहा है। इस दौरान 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन मिश्रित ईंधनों पर चल चुकी हैं।
एक प्रमुख वाहन निर्माता ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की गई, जिनमें से लगभग 1.5 करोड़ वाहन ई20 के लिए प्रमाणित नहीं थे। कंपनी ने ई20 के कारण किसी भी प्रकार की जंग या पुर्जों की उम्र कम होने की कोई शिकायत नहीं की।
सरकार ने कहा कि ई20 ईंधन के परीक्षण सफल होने के बाद ही इसे लागू किया गया। मंत्री ने बताया कि यदि वाहन निर्माता परीक्षणों के परिणामों से संतुष्ट नहीं होते, तो वे ई20 को मंजूरी नहीं देते। एसआईएएम और एआरएआई के अनुसार, ई20 ईंधन से वाहन की एक्सेलरेशन और राइड क्वालिटी में सुधार होता है।