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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामलों में मुआवजे की जिम्मेदारी तय की

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से संबंधित नियमों के कार्यान्वयन में कमी पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए राज्यों को भारी मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, कुत्ता प्रेमियों और उन्हें खाना खिलाने वालों को भी जिम्मेदार ठहराने की बात कही गई है। जानें इस महत्वपूर्ण मामले की पूरी जानकारी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पीछे की वजह।
 

सुप्रीम कोर्ट की चिंता और आदेश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले पांच वर्षों में आवारा कुत्तों से संबंधित नियमों के कार्यान्वयन में कमी पर चिंता व्यक्त की है। मंगलवार को कोर्ट ने कहा कि वह कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए राज्यों को ‘भारी मुआवजा’ देने का निर्देश देगा। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए कुत्ता प्रेमियों और उन्हें खाना खिलाने वालों को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

न्यायमूर्ति नाथ ने कहा कि कुत्तों के काटने से बच्चों या बुजुर्गों की मृत्यु या चोट के हर मामले में हम राज्य सरकारों से मुआवजे की मांग करेंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले पांच वर्षों में नियमों के कार्यान्वयन में कोई कदम नहीं उठाया है। इसके साथ ही, इन आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर लोगों को इन जानवरों से इतना प्यार है, तो वे उन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते? ये कुत्ते सड़कों पर क्यों घूमते हैं, लोगों को काटते हैं और डराते हैं?

न्यायमूर्ति मेहता ने न्यायमूर्ति नाथ के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि जब कुत्ते एक नौ साल के बच्चे पर हमला करते हैं, तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? क्या वह संगठन जो उन्हें खाना खिला रहा है? क्या हम इस समस्या से आंखें मूंद सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर, 2025 के अपने आदेश में संशोधन के अनुरोध वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई की, जिसमें अधिकारियों को सार्वजनिक स्थानों और सड़कों से इन आवारा जानवरों को हटाने का निर्देश दिया गया था।