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हरियाणा के स्कूलों में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, शिक्षा पर जोर

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षा विभाग ने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। नए नियमों के तहत, यदि किसी स्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर दिखाई देता है, तो वहां के स्टाफ और प्रिंसिपल को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसके अलावा, शैक्षणिक गतिविधियों के लिए रिकॉर्डिंग की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए उच्च अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। जानें इस नए आदेश के पीछे की वजह और इसके प्रभाव।
 

हरियाणा में शिक्षा विभाग का नया आदेश

चंडीगढ़, 13 अप्रैल। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अनुशासन को बनाए रखने के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। हिसार और हांसी के स्कूलों में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, जिला शिक्षा विभाग ने रील बनाने और किसी भी गैर-शैक्षणिक वीडियो शूटिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूल केवल शिक्षा का स्थान हैं, न कि मनोरंजन का। यदि किसी स्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर दिखाई देता है, तो वहां के स्टाफ और प्रिंसिपल को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।


पढ़ाई के समय वीडियो बनाने पर रोक

हाल के दिनों में देखा गया है कि शिक्षक और छात्र स्कूल के समय में क्लासरूम या खेल के मैदान में रील बनाकर अपलोड कर रहे हैं। इस तरह की गतिविधियों ने स्कूलों की गरिमा को प्रभावित किया है। विभाग का मानना है कि इससे छात्रों की प्राइवेसी और सुरक्षा को खतरा होता है, साथ ही पढ़ाई का महत्वपूर्ण समय भी बर्बाद होता है। इसी कारण विभाग ने 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई है ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे।


प्रिंसिपल और शिक्षकों की जिम्मेदारी

नए निर्देशों के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो की गहन जांच की जाएगी। यदि कोई शिक्षक दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, स्कूल के अनुशासन को बनाए रखने में विफल रहने पर प्रिंसिपल की भी जवाबदेही तय की गई है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया के इस युग में नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब स्कूलों में केवल पढ़ाई और अनुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी।


रिकॉर्डिंग की अनुमति

हालांकि, विभाग ने शैक्षणिक गतिविधियों के लिए कुछ रियायतें दी हैं। स्कूल में होने वाले जागरूकता कार्यक्रम, सांस्कृतिक उत्सव या शैक्षणिक गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग की अनुमति होगी, लेकिन इसके लिए संबंधित उच्च अधिकारियों से लिखित अनुमति लेनी होगी। इस दौरान शिक्षकों की निगरानी अनिवार्य होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कैमरा केवल शिक्षा और सुधार के लिए उपयोग किया जा रहा है, न कि रील बनाने के लिए।