हर्षित रेड्डी की नई फिल्म 'दीवाना' ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
अभिनेता हर्षित रेड्डी की नई फिल्म 'दीवाना' ने दर्शकों के बीच धूम मचा दी है। यह एक युवा रोमांटिक एंटरटेनर है, जिसमें एक साधारण कॉलेज लव स्टोरी से लेकर एक अप्रत्याशित मोड़ तक की यात्रा है। फिल्म में हर्षित और स्नेहा का अभिनय दर्शकों को भावुक करता है। जानें फिल्म की कहानी, मजबूत और कमजोर पक्ष, और क्या यह फिल्म देखने लायक है।
Jun 20, 2026, 13:33 IST
फिल्म 'दीवाना' की रिलीज
अभिनेता हर्षित रेड्डी, जिन्होंने 'कल्कि' और 'शुभम' जैसी फिल्मों में अपनी पहचान बनाई है, ने एक बार फिर बड़े पर्दे पर कदम रखा है। उनकी नई फिल्म 'दीवाना' आज, 20 जून 2026 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई है। इस फिल्म को श्रीकांत संगीशेट्टी ने लिखा और निर्देशित किया है, और यह एक युवा रोमांटिक एंटरटेनर है। प्रतिष्ठित डिस्ट्रीब्यूशन हाउस 'गीता आर्ट्स' द्वारा वितरित इस फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्साह इतना था कि इसके कई पेड प्रीमियर शो रिलीज़ से पहले ही आयोजित किए गए। आइए देखते हैं कि यह प्यारी सी यूथ लव स्टोरी बॉक्स ऑफिस और दर्शकों की अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतरती है।
फिल्म की कहानी का सार
कहानी का मुख्य पात्र मुन्ना (हर्षित रेड्डी) है, जो एक आम और बेफिक्र युवा है। वह अपनी जिम्मेदारियों से दूर रहकर अपने दोस्तों के साथ मस्ती करना पसंद करता है। मुन्ना की जिंदगी में एक बड़ा मोड़ तब आता है जब उसकी मुलाकात अम्मू (स्नेहा मणिमेघलाई) से होती है। अम्मू के आगमन से मुन्ना की जिंदगी में रोमांस, हंसी-मजाक और कॉलेज के विरोधी ग्रुप के साथ झगड़ों का सिलसिला शुरू होता है। मुन्ना के माता-पिता, शेखर (नरेश) और माँ (झांसी) भी कहानी में शामिल होते हैं, जो मुन्ना के व्यवहार और निर्णयों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं। फिल्म की शुरुआत एक साधारण कैंपस लव स्टोरी की तरह होती है, लेकिन इंटरवल पर एक अप्रत्याशित मोड़ आता है, जो कहानी को पूरी तरह बदल देता है और इसे गहरे जज्बातों और पारिवारिक भावनाओं की ओर ले जाता है।
अभिनय और प्रदर्शन
हर्षित रेड्डी (मुन्ना): हर्षित ने इस किरदार को आत्मविश्वास के साथ निभाया है। उनका परिवर्तन बेफिक्र युवा से जिम्मेदार प्रेमी बनने तक उनकी आंखों और बॉडी लैंग्वेज में स्पष्ट है। उन्होंने तेलंगाना के स्थानीय लहजे को स्वाभाविक रूप से प्रस्तुत किया है, जो युवाओं से जुड़ता है।
स्नेहा मणिमेघलाई (अम्मू): स्नेहा ने इस फिल्म से एक ताज़गी भरा डेब्यू किया है। वह फनी और इमोशनल दोनों दृश्यों में संतुलन बनाए रखती हैं। प्री-क्लाइमेक्स और क्लाइमेक्स में उनका अभिनय देखने लायक है, जहाँ उन्होंने ईमानदारी से अपने भावनाओं को व्यक्त किया है।
सपोर्टिंग कास्ट: नरेश ने पिता के रोल में बेहतरीन काम किया है, जबकि झांसी ने माँ के रूप में अपनेपन और कॉमिक टाइमिंग से प्रभावित किया है। मुन्ना के दोस्त के रूप में विक्रांत ने फिल्म में ऊर्जा भरी है। रोलर रघु और वेणु का स्क्रीन टाइम कम होने के बावजूद उनकी कॉमिक टाइमिंग ने छाप छोड़ी है।
फिल्म के मजबूत पक्ष
'दीवाना' की सबसे बड़ी ताकत इसका अप्रत्याशित इंटरवल ट्विस्ट है। पहले भाग में साधारण कॉलेज लव स्टोरी दिखाई गई है, लेकिन मध्यांतर पर आने वाला मोड़ कहानी को गंभीर और इमोशनल ड्रामा में बदल देता है। फिल्म का दूसरा हाफ पारिवारिक भावनाओं और Gen Z की जिम्मेदारियों को दर्शाता है, जो दर्शकों को भावुक करता है। हर्षित और स्नेहा की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री भी शानदार है। तकनीकी दृष्टि से, वामसी पचिपुुलुसु की सिनेमैटोग्राफी और ईश्वर चंद का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की भावनाओं को मजबूती प्रदान करते हैं।
फिल्म के कमजोर पक्ष
फिल्म की शुरुआत धीमी और घिसी-पिटी लगती है। पहले हाफ में कॉलेज के पुराने ढर्रे के झगड़े और गलतफहमियां दिखाई गई हैं, जो नयापन नहीं देतीं। कुछ दृश्यों में स्क्रीनप्ले की गति धीमी हो जाती है, जिससे कहानी खिंची हुई लगती है। ऋषिकेश पसपाल की एडिटिंग पहले हाफ में थोड़ी ढीली रही है। सहायक कलाकारों में जीवन कुमार का अभिनय कुछ दृश्यों में जरूरत से ज्यादा लाउड लगता है।
सिनेमाई विश्लेषण
डायरेक्टर श्रीकांत संगीशेट्टी ने पहले हाफ को हल्का-फुल्का रखा है ताकि दर्शक किरदारों से जुड़ सकें। इंटरवल का मोड़ कहानी को नया दृष्टिकोण देता है। तकनीकी दृष्टि से, वामसी पचिपुुलुसु की सिनेमैटोग्राफी और ईश्वर चंद का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को मजबूती देते हैं।
निष्कर्ष
'दीवाना' एक जानी-पहचानी प्रेम कहानी होते हुए भी अपने साहसी ट्विस्ट, बेहतरीन अभिनय और पारिवारिक भावनाओं के संतुलन के कारण एक सफल फिल्म बनकर उभरती है। यह एक सकारात्मक, 'फील-गुड' सिनेमा है जो दर्शकों को एक उम्मीद भरे नोट पर छोड़ता है।
रेटिंग: 3.5/5 स्टार्स (एक बार जरूर देखने लायक)