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‘द केरल स्टोरी 2’ पर केरल उच्च न्यायालय का नोटिस, फिल्म के प्रमाणन पर उठे सवाल

फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2 - गोज बियॉन्ड’ के खिलाफ केरल उच्च न्यायालय ने नोटिस जारी किया है। याचिका में फिल्म के प्रमाणन को रद्द करने और शीर्षक में बदलाव की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि फिल्म में कई राज्यों की महिलाओं की कहानियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।
 

फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ की मुश्किलें बढ़ीं

फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के सीक्वल ‘द केरल स्टोरी 2 - गोज बियॉन्ड’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। केरल उच्च न्यायालय ने इस फिल्म के निर्माताओं, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और केंद्र सरकार को एक याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में फिल्म के प्रमाणन को रद्द करने और इसके शीर्षक में बदलाव की मांग की गई है.


याचिका में क्या कहा गया?

याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि वह फिल्म के प्रमाणन को रद्द करे और शीर्षक पर पुनर्विचार करने के लिए निर्देश दे। कन्नूर जिले के कन्नवम निवासी याचिकाकर्ता श्रीदेव नंबूदरी ने 18 फरवरी को यह याचिका दायर की, जिसमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सीबीएफसी और निर्माता विपुल अमृतलाल शाह को प्रतिवादी बनाया गया है.


अदालत की सुनवाई

न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस की अध्यक्षता वाली पीठ ने बृहस्पतिवार को याचिका पर विचार करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को निर्धारित की। याचिका में कहा गया है कि सीबीएफसी ने सिनेमाटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत वैधानिक जनादेश का पालन किए बिना फिल्म को प्रमाण पत्र दिया है.


फिल्म की रिलीज की तारीख

यह फिल्म 27 फरवरी को रिलीज होने वाली है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म के टीजर और ट्रेलर में कई राज्यों की महिलाओं से जुड़ी कहानियों को दर्शाया गया है, लेकिन इसे ‘द केरल स्टोरी’ के रूप में ब्रांड किया गया है, जिसमें आतंकवाद, जबरन धर्मांतरण और जनसांख्यिकीय षड्यंत्र की घटनाओं को विशेष रूप से केरल से जोड़ा गया है.


सामाजिक प्रभाव की चिंता

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह के चित्रण से पूरे क्षेत्रीय समुदाय के प्रति नकारात्मक धारणा बनने, सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने और सांप्रदायिक एवं क्षेत्रीय असामंजस्य भड़कने की आशंका है। याचिकाकर्ता ने बताया कि फिल्म के पहले भाग में पहले ही गंभीर विवाद उत्पन्न हुआ था, जिसे उच्चतम न्यायालय ने संज्ञान में लिया था.


सीबीएफसी की भूमिका पर सवाल

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि सीबीएफसी ने सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता पर फिल्म के प्रभाव की पर्याप्त जांच किए बिना ही इसके ‘सीक्वल’ को प्रमाणन प्रदान कर दिया, जबकि ऐसा करना सिनेमाटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 5बी के तहत अनिवार्य है.