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अक्षय तृतीया: महत्व, पूजा विधि और विशेष उपाय

अक्षय तृतीया का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन दान, जप और पूजा का फल अनंत होता है। जानें इस पर्व की पूजा विधि, मंत्र और विशेष उपाय, जो आपके जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद कर सकते हैं। इस वर्ष अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी।
 

अक्षय तृतीया का पर्व

बैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन दान, जप, तप और निवेश करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया पर किए गए दान और पूजा का फल अनंत होता है, जो कभी समाप्त नहीं होता। इस दिन 'अबूझ मुहूर्त' होता है, जिसका अर्थ है कि किसी भी शुभ कार्य के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन किए गए दान और स्नान से व्यक्ति को अनंत फल की प्राप्ति होती है।


अक्षय तृतीया की विशेषताएँ

अक्षय तृतीया पर किए गए अच्छे कार्य इस जन्म के साथ-साथ परलोक में भी लाभकारी होते हैं। इस वर्ष, अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने नर-नारायण, परशुराम और हयग्रीव के अवतार लिए थे। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इसके अलावा, अक्षय तृतीया पर वस्त्र, शस्त्र और आभूषण खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।


अक्षय तृतीया मंत्र

अक्षय तृतीया मंत्र:


'एष धर्मघटो दत्तो ब्रह्मविष्णुशिवात्मकः। अस्य प्रदानात्सकला मम सन्तु मनोरथाः॥'


घड़ा दान करने के नियम

अक्षय तृतीया को धातु या मिट्टी के कलश में जल, फल, पुष्प, गंध, तिल और अन्न भरकर, उपरोक्त मंत्र का उच्चारण करते हुए दान करें। ऐसा करने से परलोक में आपको और आपके पूर्वजों को कभी भी प्यासा नहीं रहना पड़ता। इससे पितृ प्रसन्न रहते हैं और वंश वृद्धि होती है।


अक्षय तृतीया पर उपाय

इस दिन व्यक्ति विशेष के नाम से अनाज को तौलकर किसी पवित्र स्थान पर रख दें। अगले दिन फिर से उस अनाज को तौले। यदि अनाज का वजन कम हुआ है, तो यह भविष्य में कठिनाइयों का संकेत है। यदि वजन समान रहा, तो भविष्य सामान्य रहेगा, और यदि वजन बढ़ता है, तो यह संकेत है कि आने वाला समय आपके लिए शुभ रहेगा।