अधिकमास वरदा चतुर्थी व्रत: महत्व और पूजा विधि
अधिकमास वरदा चतुर्थी व्रत हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन विशेष पूजा विधि और मंत्रों का पालन करके भक्त सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त कर सकते हैं। जानें इस व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि, जिससे आप गणेश जी की कृपा प्राप्त कर सकें।
May 20, 2026, 14:40 IST
अधिकमास वरदा चतुर्थी का महत्व
आज अधिकमास वरदा चतुर्थी का व्रत है, जिसे हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह व्रत जीवन में सुख और समृद्धि लाने के लिए किया जाता है। आइए, जानते हैं इस व्रत का महत्व और पूजा विधि के बारे में।
अधिकमास वरदा चतुर्थी के बारे में जानकारी
अधिकमास वरदा चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है और इसे अत्यंत शुभ तिथि माना जाता है। यह अधिक मास की शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 20 मई, बुधवार को आएगा। इसे वरद चतुर्थी या वरद विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन गणेश जी की पूजा से विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है।
अधिकमास वरदा विनायक चतुर्थी का शुभ मुहूर्त
अधिकमास की वरदा चतुर्थी 19 मई 2026 को दोपहर 2:18 बजे शुरू होगी और 20 मई 2026 को सुबह 11:06 बजे समाप्त होगी।
चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त - सुबह 10:56 - सुबह 11:06
वर्जित चंद्रदर्शन का समय - सुबह 8:43 - रात 11:08
अधिकमास वरदा विनायक चतुर्थी व्रत का महत्व
पंडितों के अनुसार, इस मास को "अतिशय पुण्यप्रद मास" कहा गया है, इसलिए इस दौरान किया गया गणपति व्रत सहस्र गुणा पुण्यदायी होता है। यह व्रत सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति दिलाता है और सुख, शांति एवं समृद्धि प्रदान करता है।
पूजा विधि और लाभ
वरदा चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को शुद्ध करके भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। गणेश जी को सिंदूर का तिलक अर्पित करें और 21 दूर्वा दल अर्पित करते समय “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का उच्चारण करें। अंत में आरती उतारें। इस दिन ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराना और दान देना भी शुभ माना जाता है।
सिंदूर चढ़ाने का मंत्र
सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् । शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् ॥
सिंदूर को ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसे गणेश जी को अर्पित करने से मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है।
वरदा विनायक चतुर्थी व्रत के विशेष कार्य
वरदा चतुर्थी पर उपवास रखें और गणेश जी की पूजा करें। उन्हें सिंदूर का तिलक लगाना न भूलें। 'श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि।' मंत्र का जप करते हुए 21 दुर्वा अर्पित करें। पूजा के बाद जरूरतमंदों को दान देना भी आवश्यक है।
धार्मिक महत्व
भविष्य पुराण के अनुसार, अधिकमास में वरदा विनायक चतुर्थी का व्रत अत्यंत फलदायी है। यह व्रत सभी विघ्नों को दूर करता है और सुख, शांति, धन, संतान, यश और दीर्घायु प्रदान करता है।
पौराणिक कथा
पुराणों में एक कथा प्रचलित है जिसमें माता पार्वती और भगवान शिव चौपड़ खेल रहे थे। खेल में कठिनाइयों का सामना करते हुए, एक बालक को बनाया गया। पार्वती जी की जीत के बावजूद बालक ने महादेव को विजेता बताया, जिससे पार्वती जी ने उसे श्राप दिया। बाद में बालक ने गणेश जी की उपासना की और उन्हें वरदान मिला।