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अपरा एकादशी: व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

अपरा एकादशी, जो भगवान विष्णु को समर्पित है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत व्यक्ति के दुखों को दूर करने और इच्छाओं की पूर्ति में सहायक माना जाता है। जानें इस व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम, ताकि आप इस दिन को सही तरीके से मना सकें।
 

अपरा एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष स्थान है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे रखने से सभी दुखों का निवारण और इच्छाओं की पूर्ति मानी जाती है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अपरा या अचला एकादशी कहा जाता है। आइए जानते हैं इस दिन व्रत रखने का समय, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि।


अपरा एकादशी का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की एकादशी तिथि 12 मई 2026 को दोपहर 02:52 बजे से शुरू होकर 13 मई 2026 को दोपहर 01:29 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा। इसका पारण 14 मई 2026, गुरुवार को प्रातः 05:31 से 08:14 के बीच करना शुभ माना गया है।


अपरा एकादशी व्रत की पूजा विधि

- व्रत रखने वाले व्यक्ति को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान और ध्यान करना चाहिए।


- इसके बाद, घर के ईशान कोण में पीला वस्त्र बिछाकर संकल्प लें।


- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को वहां रखें।


- जल छिड़ककर श्री हरि को पीला चंदन या केसर का तिलक करें और पीले फूल, फल, मिठाई और तुलसी दल अर्पित करें।


- श्री विष्णु के समक्ष शुद्ध देसी घी का दीप जलाकर एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।


- अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।


- व्रत को नियमपूर्वक रखें और अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण करें।


- भगवान विष्णु से अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें और पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें।


अपरा एकादशी व्रत के नियम

- अपरा एकादशी के दिन पुण्य फल पाने के लिए प्रातः जल तीर्थ में स्नान करें।


- यह व्रत तुलसी की पूजा के बिना अधूरा माना जाता है, इसलिए भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।


- साधक को पीले वस्त्र पहनने चाहिए और पूजा में पीली चीजों का उपयोग करना चाहिए।


- व्रत को निराहार या फलाहार रखा जा सकता है।


- इस दिन चावल का प्रयोग न करें।


- केवल सात्विक भोजन का सेवन करें और तामसिक चीजों से दूर रहें।


- मंदिर के पुजारी या जरूरतमंद को दान करें।


- गलत विचारों से बचने के लिए भगवान विष्णु के मंत्र का जप करें।