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अहोई अष्टमी 2026: जानें तारे दर्शन का समय और पूजा विधि

अहोई अष्टमी 2026 का व्रत माताओं के लिए संतान की खुशहाली की कामना से जुड़ा है। इस दिन तारे देखने का विशेष महत्व है। जानें विभिन्न शहरों में तारे कब दिखाई देंगे और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है। व्रत का पारण कैसे करें, इसके लिए आवश्यक विधि और सामग्री की जानकारी भी प्राप्त करें।
 

अहोई अष्टमी का महत्व


नई दिल्ली: अहोई अष्टमी का व्रत उन माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जो अपने बच्चों की खुशहाली की कामना करती हैं। आज शाम, माताएं अहोई माता की पूजा करेंगी और तारे देखने का इंतजार करेंगी। मान्यता है कि तारे को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। चूंकि विभिन्न शहरों में तारे दिखने का समय भिन्न हो सकता है, आइए जानते हैं दिल्ली, नोएडा, लखनऊ और जयपुर जैसे प्रमुख शहरों में तारे कब दिखाई देंगे।


तारों के दर्शन का समय

इस वर्ष अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। दिल्ली में तारे शाम 6 बजे, नोएडा में 6:01 बजे और गाजियाबाद में 6 बजे दिखाई देने की संभावना है। लखनऊ में तारे शाम 5:48 बजे, कोलकाता में 5:22 बजे और जयपुर में 6:08 बजे दिख सकते हैं। चंडीगढ़, मथुरा और वृंदावन में भी तारे शाम 6 बजे, भोपाल में 6:05 बजे, आगरा में 5:59 बजे, वाराणसी में 5:41 बजे और चेन्नई में 6:04 बजे दिखाई देने की उम्मीद है। हालांकि, ये समय अनुमानित हैं और मौसम की स्थिति के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।


पूजा का शुभ मुहूर्त

अहोई अष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त


पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को दोपहर 2:51 बजे से शुरू होगा और 2 नवंबर को 1:10 बजे समाप्त होगा। दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:36 बजे से 6:54 बजे तक रहेगा। तारे देखने का समय शाम 6 बजे के आसपास है। चंद्रमा रात 11:40 बजे दिखाई देने की संभावना है।


व्रत का पारण कैसे करें?

तारों को अर्घ्य देकर कैसे करें व्रत का पारण?


शाम को स्नान कर साफ कपड़े पहनें। अहोई माता के चित्र के सामने दीपक जलाएं और रोली, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएं। व्रत कथा सुनें या पढ़ें। तारे दिखने पर करवे के जल से अर्घ्य दें और संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें। अंत में माता को भोग लगाकर व्रत खोलें।


कुछ क्षेत्रों में चंद्रमा देखकर व्रत खोलने की परंपरा है, जबकि उत्तर भारत में अधिकतर महिलाएं तारों को अर्घ्य देकर पारण करती हैं। दिल्ली में चंद्रोदय रात 11:40 बजे होने की संभावना है, इसलिए चंद्रमा देखकर व्रत खोलने वालों को देर रात तक इंतजार करना पड़ सकता है। अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखा जाता है। मान्यता है कि अहोई माता की पूजा और कथा सुनने से संतान पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।