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आषाढ़ अमावस्या: भौमवती अमावस्या का महत्व और तिथि

आषाढ़ माह की अमावस्या, जिसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाता है, इस बार मंगलवार को पड़ रही है। यह दिन पितरों के तर्पण, दान-पुण्य और मंगल दोष की शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जानें इस दिन की सही तिथि, महत्व और विशेष उपाय जो पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में सहायक होते हैं।
 

आषाढ़ अमावस्या का महत्व

हिंदू धर्म में आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या का विशेष महत्व है। इस वर्ष, यह तिथि मंगलवार को पड़ रही है, जिसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।


तर्पण और दान का महत्व

यह दिन पितरों के तर्पण, मंगल दोष की शांति, दान-पुण्य और कालसर्प दोष निवारण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। हालांकि, कई लोगों को आषाढ़ अमावस्या की सही तिथि को लेकर संदेह है। आइए जानते हैं कि यह तिथि 13 जुलाई को मनाई जाएगी या 14 जुलाई को।


आषाढ़ अमावस्या तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की अमावस्या तिथि 13 जुलाई की शाम 06:49 बजे से शुरू होगी और 14 जुलाई को दोपहर 03:12 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन स्नान, दान, तर्पण और श्राद्ध करना शास्त्र सम्मत है।


भौमवती अमावस्या के उपाय

इस बार आषाढ़ अमावस्या मंगलवार को है, इसलिए इसे भौमवती अमावस्या कहा जाएगा। इस दिन तर्पण करने से आर्थिक संकट और शत्रु भय से मुक्ति मिलती है। पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए, और यदि यह संभव न हो, तो घर के स्नान के पानी में गंगाजल मिलाना शुभ माना जाता है।


इस दिन किए गए उपायों से पितर प्रसन्न होते हैं, पितृ दोष दूर होता है, और परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस दिन किए गए दान और तर्पण का फल कई गुना बढ़ जाता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो पितृ दोष से प्रभावित हैं।