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आषाढ़ माह में योगिनी और देवशयनी एकादशी: तिथियाँ और व्रत की जानकारी

आषाढ़ माह की शुरुआत के साथ योगिनी एकादशी और देवशयनी एकादशी का पर्व नजदीक है। जानें इन विशेष तिथियों के बारे में, व्रत पारण का सही समय और उन महत्वपूर्ण बातों के बारे में जिनका ध्यान रखना आवश्यक है। इस लेख में हम आपको सभी आवश्यक जानकारी प्रदान करेंगे, जिससे आप इन पर्वों को सही तरीके से मना सकें।
 

आषाढ़ माह की शुरुआत

वैदिक पंचांग के अनुसार, 30 जून से आषाढ़ माह की शुरुआत हो चुकी है, जो 29 जुलाई तक चलेगा। इस महीने में योगिनी एकादशी और देवशयनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास की अवधि शुरू होती है, जिसमें कोई मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि आषाढ़ माह में योगिनी एकादशी और देवशयनी एकादशी कब मनाई जाएगी।


योगिनी एकादशी की तिथि और मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 08:16 बजे से शुरू होगी और 11 जुलाई को सुबह 05:22 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।


व्रत पारण का समय

योगिनी एकादशी का पारण 11 जुलाई को किया जाएगा। इस दिन पारण का समय दोपहर 01:50 बजे से लेकर शाम 04:36 बजे तक है।


देवशयनी एकादशी की तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत होगा, जो चातुर्मास की शुरुआत का संकेत है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 09:12 बजे से शुरू होगी और 25 जुलाई को दिन में 11:34 बजे समाप्त होगी।


देवशयनी एकादशी पारण का समय

25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी का पारण किया जाएगा। इस दिन पारण का समय सुबह 05:39 बजे से लेकर 08:22 बजे तक है। इस दौरान किसी भी समय व्रत पारण किया जा सकता है।


विशेष ध्यान देने योग्य बातें

एकादशी तिथि पर चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।


इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए और न ही तुलसी के पौधे में जल देना चाहिए।


घर और मंदिर की सफाई का ध्यान रखें।


इस दिन बातचीत में गलत शब्दों का प्रयोग न करें।


तामसिक भोजन से बचना चाहिए।