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उत्तराखंड में धारी देवी मंदिर की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी

उत्तराखंड में धारी देवी मंदिर की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि अलकनंदा नदी में भारी बारिश के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय लोग मानते हैं कि मां धारी देवी की नाराजगी से तबाही का खतरा है, जैसा कि 2013 में हुआ था। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। जानें इस मंदिर की पौराणिक कथा और भक्तों की आस्था के बारे में।
 

धारी देवी मंदिर की स्थिति

धारी देवी मंदिर: उत्तराखंड इस समय मौसम की कठिनाइयों का सामना कर रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह चारधाम की रक्षा करने वाली मां धारी देवी की नाराजगी का परिणाम है। अलकनंदा नदी में भारी बारिश के कारण जलस्तर बढ़ गया है, जिससे घाटों के डूबने की घटनाएं सामने आ रही हैं। लोगों की सबसे बड़ी चिंता मां धारी देवी मंदिर की सुरक्षा को लेकर है। उत्तराखंड के निवासी मानते हैं कि यदि मां धारी देवी नाराज हो गईं, तो तबाही से बचना मुश्किल होगा। इस स्थिति ने 2013 की विनाशकारी आपदा की यादें ताजा कर दी हैं और स्थानीय लोग गहरी चिंता में हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में और बारिश की चेतावनी दी है.


आस्था और डर का मिश्रण

धारी देवी मंदिर के प्रति आस्था, डर और इतिहास का गहरा संबंध है। भक्तों का विश्वास है कि यह मंदिर उत्तराखंड को हर संकट से बचाता है। लेकिन 2013 की आपदा ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि देवी के मूल स्थान से मंदिर का स्थानांतरण ही विनाश का कारण बना। अब फिर से वही डर लौट आया है क्योंकि अलकनंदा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन ने भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सवाल यह है कि कहीं मां धारी देवी एक बार फिर नाराज तो नहीं हो गईं?


मां धारी देवी के रूप

मां दिन में तीन बार रूप बदलती हैं

गढ़वाल क्षेत्र के श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी के किनारे स्थित धारी देवी मंदिर को लोग चमत्कारी मानते हैं। देवी का पूरा शरीर एक ही मंदिर में नहीं है, बल्कि इसे अलग-अलग मंदिरों में रखा गया है। माता का ऊपरी भाग यहां विस्थापित किया गया है, जबकि निचला भाग कालीमठ में है। भक्त देवी काली के रूप में उनकी पूजा करते हैं। कहा जाता है कि मां धारी देवी दिन में तीन बार अलग-अलग रूप धारण करती हैं, जिससे उन्हें चारधाम की संरक्षक और उत्तराखंड की रक्षक देवी के रूप में जाना जाता है.


प्रशासन की चेतावनी

प्रशासन और मंत्री ने जारी किया अलर्ट

प्रशासन ने हालात को देखते हुए लोगों को चेतावनी दी है। यहां लगातार भारी बारिश हो रही है, जिससे मंदिर और आसपास के स्कूलों पर खतरा मंडरा रहा है। उत्तराखंड के मंत्री धन सिंह रावत ने भी चेतावनी दी है कि अलकनंदा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा है। उन्होंने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं.


2013 की त्रासदी का धारी देवी से संबंध

2013 की त्रासदी का धारी देवी से संबंध

16 जून 2013 को अलकनंदा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के लिए धारी देवी मंदिर को उसके मूल स्थान से हटाया गया था। मंदिर हटाने के कुछ ही घंटों बाद विनाशकारी बादल फटने और बाढ़ ने उत्तराखंड को तबाह कर दिया। हजारों जानें गईं और सैकड़ों गांव उजड़ गए। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह सब मां धारी देवी के क्रोध का परिणाम था। दिलचस्प बात यह है कि 1882 में भी जब मंदिर को हटाने की कोशिश हुई थी, तब एक भयंकर भूस्खलन ने केदारनाथ को समतल कर दिया था.


धारी देवी मंदिर की कथा

धारी देवी मंदिर की कथा क्या है?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, धारी देवी का सिर अलकनंदा की बाढ़ में बहकर धारी गांव में आकर रुका था। वहां स्थानीय लोगों ने इसे स्थापित किया और तभी से यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बन गया। कहा जाता है कि देवी का स्वरूप भक्तों की रक्षा करता है, लेकिन जब उन्हें कष्ट पहुंचता है तो उनका प्रकोप भारी पड़ता है.