करवा चौथ 2023: जानें पूजा विधि और चांद निकलने का समय
करवा चौथ का पर्व: तैयारी शुरू
नई दिल्ली: सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का पर्व विशेष महत्व रखता है, और इसकी तैयारियां अब शुरू हो चुकी हैं। यह व्रत हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत करती हैं। इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को होगा। चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1:06 बजे प्रारंभ होगी और रात 10:09 बजे समाप्त होगी। चूंकि यह व्रत चंद्रमा के उदय के साथ मनाया जाता है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार 29 अक्टूबर को ही व्रत मान्य होगा।
चांद का निकलने का समय
चांद कब निकलेगा?
करवा चौथ पर चांद का निकलना सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस साल, 29 अक्टूबर को चांद रात लगभग 8:17 बजे निकलने की संभावना है। हालांकि, विभिन्न शहरों में चंद्रोदय का समय भिन्न हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र का स्थानीय समय अवश्य देखें।
पूजा विधि
कैसे करें पूजा?
सुबह स्नान के बाद व्रत और चौथ माता की पूजा का संकल्प लें। दिनभर निर्जला व्रत रखें और शाम को सोलह श्रृंगार कर पूजा की तैयारी करें। शुभ मुहूर्त में चौथ माता, भगवान गणेश और माता गौरी की पूजा करें। उन्हें रोली, अक्षत, फूल, धूप-दीप, गंगाजल, पंचामृत और भोग अर्पित करें। रात में चांद निकलने पर छलनी से चंद्रमा के दर्शन करें और अर्घ्य दें। इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलें। पूजा में पारिवारिक परंपरा का पालन करना भी आवश्यक है।
सोलह श्रृंगार का महत्व
सोलह श्रृंगार का महत्व
करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है। इसमें बिंदी-सिंदूर सुहाग का प्रतीक है, मेहंदी शुभता लाती है, और मांगटीका तथा काजल श्रृंगार को पूरा करते हैं। मंगलसूत्र, चूड़ियां, पायल-बिछिया, झुमके, बाजूबंद, लाल जोड़ा, बालों में गजरा और इत्र - ये सभी सुहागिन के श्रृंगार का हिस्सा माने जाते हैं।
करवा चौथ की कथा
करवा चौथ की कथा
कथा के अनुसार, एक साहूकार की बेटी वीरवती ने अपने ससुराल में पहली बार करवा चौथ का व्रत रखा। वह मायके आई हुई थी और चांद न निकलने के कारण परेशान थी। उसके भाइयों ने पीपल के पीछे रोशनी दिखाकर नकली चांद बना दिया। वीरवती ने उसे असली चांद समझकर व्रत तोड़ दिया, जिससे उसके पति की तबीयत बिगड़ गई और वह अदृश्य हो गया। बाद में उसने 12 महीने तक हर चतुर्थी का व्रत किया और अगले करवा चौथ पर विधिपूर्वक पूजा की, जिससे उसे पति वापस मिल गया। यह कथा बताती है कि व्रत में श्रद्धा और नियम कितने महत्वपूर्ण हैं।