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कामदा सप्तमी व्रत: महत्व और पूजा विधि

कामदा सप्तमी व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान सूर्य को समर्पित है। यह व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है और इसके माध्यम से भक्त स्वास्थ्य, धन, और संतान की प्राप्ति करते हैं। जानें इस व्रत का महत्व, पूजा विधि और पौराणिक कथा, जो इसे विशेष बनाती है।
 

कामदा सप्तमी व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में कामदा सप्तमी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान सूर्य को समर्पित होता है और इसे मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत के माध्यम से व्यक्ति स्वास्थ्य, धन, संतान और प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकता है। आइए जानते हैं इस व्रत का महत्व और पूजा विधि।


कामदा सप्तमी व्रत के बारे में जानकारी

कामदा सप्तमी व्रत एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान सूर्य को समर्पित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान सूर्य अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं और उनके पापों को दूर करते हैं। यह पर्व भारत के विभिन्न हिस्सों में, विशेषकर उत्तर भारत में, धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष कामदा सप्तमी व्रत 24 फरवरी को है।


कामदा सप्तमी व्रत की पूजा विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, षष्ठी को एक बार भोजन करके सप्तमी को उपवास रखा जाता है। इस दिन भक्त सूर्य भगवान की पूजा करते हैं और 'खखोल्काय नमः' मंत्र का जाप करते हैं। अष्टमी को स्नान के बाद सूर्य देव का हवन किया जाता है। इस दिन घी, गुड़ आदि का दान भी किया जाता है।


त्योहार के रीति-रिवाज

भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ कपड़े पहनते हैं। वे भगवान विष्णु या सत्यनारायण की पूजा करते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं। उपवास रखने वाले भक्त फल या केवल पानी का सेवन करते हैं। कुछ भक्त पवित्र नदी में स्नान करते हैं या दान-पुण्य करते हैं।


कामदा सप्तमी व्रत का आध्यात्मिक महत्व

पंडितों के अनुसार, उपवास से शरीर और मन की शुद्धि होती है, जिससे भक्त आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर होते हैं। यह व्रत भगवान के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उनके लिए यह व्रत लाभकारी होता है।


कामदा सप्तमी व्रत की पौराणिक कथा

प्राचीन काल में एक राजा था, जिसके पास सब कुछ था लेकिन संतान नहीं थी। राजा ने ऋषियों से उपाय पूछा, जिन्होंने उन्हें कामदा सप्तमी व्रत करने की सलाह दी। राजा और रानी ने इस व्रत को श्रद्धा से किया और अंततः उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई।


कामदा सप्तमी व्रत का उद्देश्य

कामदा सप्तमी व्रत न केवल भक्ति और आत्म-संयम को बढ़ावा देता है, बल्कि यह हिंदू संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। यह त्योहार हमें हमारी परंपराओं को बनाए रखने की प्रेरणा देता है। भक्त इस व्रत के माध्यम से भगवान की सेवा करते हैं और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।