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कार्तिक मास: आहार और नियमों की जानकारी

कार्तिक मास का महत्व और इस दौरान खानपान के नियमों के बारे में जानें। इस महीने में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसके साथ ही धार्मिक मान्यताओं और सरल उपायों की जानकारी प्राप्त करें। जानें कैसे इस महीने में दीप जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
 

कार्तिक मास का महत्व

कार्तिक मास की शुरुआत हो चुकी है, जिसे दामोदर मास भी कहा जाता है। यह महीना भगवान विष्णु के लिए विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। इस दौरान स्नान, दान, दीपदान और भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा का महत्व है।


कार्तिक मास में खानपान के नियम

इस महीने में खानपान के कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है। मान्यता है कि इस दौरान कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं कि कार्तिक मास में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।


क्या न खाएं?

बैंगन: इस महीने में बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह पित्त दोष को बढ़ा सकता है।


मछली: तामसिक भोजन से बचना चाहिए, विशेषकर मछली का सेवन वर्जित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु इस महीने में जल में अपने मत्स्य अवतार में होते हैं।


करेला: करेला भी इस महीने में नहीं खाना चाहिए, क्योंकि यह वातकारक होता है और इसमें कीड़े लगने का खतरा रहता है।


दही: दही का सेवन भी इस महीने में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता।


क्या खाएं?

तिल: इस महीने में तिल का सेवन करना शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु को तिल अर्पित करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।


मूली: मूली का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है, खासकर कफ और पित्त दोष से संबंधित समस्याओं में।


आंवला: आंवला नवमी के दिन आंवला का पूजन किया जाता है, और यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।


कार्तिक मास के महत्वपूर्ण नियम

- इस महीने में मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।


- शरीर पर तेल लगाना उचित नहीं है, सिवाय नरक चतुर्दशी के दिन।


- ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, क्योंकि यह इस महीने में विशेष महत्व रखता है।


- स्नान-दान का विशेष महत्व है। यदि पवित्र नदी में स्नान नहीं कर पाएं, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।


सरल उपाय

इस महीने में कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। विष्णुजी, माता लक्ष्मी, पीपल और यमदेव के समीप दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है।