कालाष्टमी 2026: जानें पूजा विधि और महत्व
कालाष्टमी का पर्व
नई दिल्ली: हिंदू धर्म में हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और विधि-विधान से पूजा करने से भय, नकारात्मकता और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। सावन महीने की कालाष्टमी इस बार 5 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी।
सावन कालाष्टमी की तिथि
पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 5 अगस्त की रात 8:42 बजे प्रारंभ होगी और इसका समापन 6 अगस्त की शाम 6:52 बजे होगा। उदया तिथि और पूजा परंपरा को ध्यान में रखते हुए कालाष्टमी का व्रत 5 अगस्त को रखा जाएगा।
कालाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
काल भैरव की पूजा के लिए रात्रि का समय विशेष महत्व रखता है। इस दिन निशिता काल में रात 11:30 बजे से 12:30 बजे तक पूजा का शुभ समय माना गया है। इस दौरान भगवान काल भैरव का ध्यान और पूजा करना अत्यंत शुभ होता है।
कालाष्टमी की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- शाम या रात में काल भैरव की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- भगवान का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
- चंदन, कुमकुम, फूल और काले तिल अर्पित करें।
- सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- भैरव चालीसा या भैरव स्तोत्र का पाठ करें।
- जलेबी, इमरती, उड़द और मिठाई का भोग लगाकर आरती करें।
कालाष्टमी का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि काल भैरव की आराधना करने से व्यक्ति को भय और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। रात में 'ॐ कालभैरवाय नमः' मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराने की परंपरा है, क्योंकि कुत्ते को काल भैरव का वाहन माना जाता है।
काल भैरव मंत्र - ॐ कालकालाय विद्महे, तन्नो काल भैरवः प्रचोदयात्॥
नोट: पूजा के मुहूर्त और तिथि में स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। यह लेख धार्मिक मान्यताओं के आधार पर लिखा गया है। मीडिया चैनल इसकी पुष्टि नहीं करता है।