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गंगा दशहरा 2026: जानें इस पावन पर्व का महत्व और पूजा विधि

गंगा दशहरा 2026 का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन मां गंगा के धरती पर अवतरण की मान्यता है। जानें इस पावन पर्व की पूजा विधि, शुभ समय और दान का महत्व। इस वर्ष के दुर्लभ योगों के बारे में भी जानें, जो इस पर्व को और भी खास बनाते हैं।
 

गंगा दशहरा का महत्व


नई दिल्ली: गंगा दशहरा का पर्व हिंदू धर्म में अत्यधिक श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। यह त्योहार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है, और इसे आत्मिक शुद्धि और पापों से मुक्ति का पर्व माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा से स्नान, पूजा और दान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप समाप्त हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस वर्ष गंगा दशहरा पर कई दुर्लभ योग बन रहे हैं, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है।


दुर्लभ योग और पूजा का महत्व

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष गंगा दशहरा पर हस्त नक्षत्र, रवि योग और व्यतिपात योग का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे दुर्लभ योगों में पूजा-पाठ और दान करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन गंगा स्नान करने या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।


दशमी तिथि और पूजा का शुभ समय

दशमी तिथि प्रारंभ: 25 मई 2026 सुबह 04:30 बजे
दशमी तिथि समाप्त: 26 मई 2026 सुबह 05:10 बजे


ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:30 बजे से 05:30 बजे तक, यह समय स्नान और ध्यान के लिए सबसे उत्तम माना गया है।


अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:17 बजे से 01:10 बजे तक, इस दौरान पूजा करने को अत्यंत शुभ माना गया है।


मां गंगा की पूजा विधि

गंगा दशहरा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि किसी पवित्र नदी तक जाना संभव न हो, तो घर के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। पूजा स्थान पर मां गंगा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीप और मिठाई अर्पित करें। पूजा के अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से की गई पूजा से मां गंगा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।


गंगा अवतरण की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार, राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया था। इंद्र देव ने यज्ञ का घोड़ा चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। जब राजा सगर के 60 हजार पुत्र घोड़े की तलाश करते हुए वहां पहुंचे, तो उन्होंने कपिल मुनि पर चोरी का आरोप लगा दिया। इससे क्रोधित होकर कपिल मुनि ने अपने तप के प्रभाव से सभी पुत्रों को भस्म कर दिया।


उन आत्माओं की मुक्ति के लिए राजा भगीरथ ने वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने मां गंगा को पृथ्वी पर भेजने की अनुमति दी। लेकिन गंगा का वेग इतना तेज था कि पृथ्वी उसे सहन नहीं कर सकती थी। तब भगवान शिव ने मां गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित किया। मां गंगा के स्पर्श से राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ।


गंगा दशहरा पर मंत्र जाप

गंगा दशहरा पर मां गंगा के इस मंत्र का जाप बेहद शुभ माना जाता है:
“ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः”
धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र का श्रद्धा से जाप करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।


गंगा दशहरा पर दान का महत्व

इस पर्व में '10' संख्या का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए इस दिन 10 प्रकार की वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। इनमें अन्न, जल, फल, वस्त्र, घी, नमक, तेल, शक्कर, पूजन सामग्री और दक्षिणा शामिल हैं। जरूरतमंद लोगों को श्रद्धा से दान करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।