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गंगा सप्तमी: महत्व, पूजा विधि और पौराणिक कथाएँ

गंगा सप्तमी, जिसे गंगा जयंती भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह वैशाख मास की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां गंगा के धरती पर अवतरण की कथा और पूजा विधि का विशेष महत्व है। गंगा स्नान करने से पापों से मुक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है। जानें इस दिन की पूजा विधि, दान का महत्व और पौराणिक कथाएँ।
 

गंगा सप्तमी का महत्व

आज गंगा सप्तमी का पर्व है, जिसे हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इसे गंगा जयंती या गंगा पूजन के नाम से भी जाना जाता है। आइए, हम आपको गंगा सप्तमी के व्रत का महत्व और पूजा विधि के बारे में जानकारी देते हैं। 


गंगा सप्तमी के बारे में जानें

सनातन धर्म में वैशाख माह का विशेष महत्व है। गंगा सप्तमी का पर्व इस माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है, खासकर उत्तर भारत में। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में समाई थीं, इसलिए इसे गंगा जन्मोत्सव भी कहा जाता है। गंगा और शिव का संबंध अटूट है, इसीलिए इस दिन शिवलिंग का विशेष अभिषेक करने से साधक को मां गंगा और शिव जी की कृपा मिलती है। इस वर्ष गंगा सप्तमी 23 अप्रैल को मनाई जाएगी।


गंगा सप्तमी की पौराणिक कथा

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, देवी गंगा पहली बार गंगा दशहरा के दिन धरती पर उतरी थीं, लेकिन ऋषि जह्नु ने सारा गंगा जल पी लिया। तब देवताओं और भागीरथ ने ऋषि से गंगा को छोड़ने का अनुरोध किया। इस प्रकार, गंगा सप्तमी के दिन देवी गंगा फिर से धरती पर आईं, इसलिए इसे जह्नु सप्तमी भी कहा जाता है।


गंगा सप्तमी पर शिवलिंग पर चढ़ाने योग्य सामग्री

पंडितों के अनुसार, इस दिन चांदी या तांबे के लोटे में गंगाजल भरकर शिवलिंग पर अर्पित करें। ऐसा करने से साधक को मोक्ष और मानसिक शांति मिलती है। शिवलिंग पर गंगाजल में काले तिल मिलाकर चढ़ाने से पितृ दोष शांत होता है। इस दिन 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए चिकना बिल्व पत्र चढ़ाएं। महादेव को शमी प्रिय है, इसलिए गंगा सप्तमी पर शमी चढ़ाने से शनि दोष के प्रभाव कम होते हैं।


गंगा सप्तमी पर पूजा विधि

गंगा सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करें। यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद मां गंगा की तस्वीर पर फूल, सिंदूर, और अक्षत अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर आरती करें और सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। इस दिन गंगा स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।


गंगा सप्तमी पर मंत्रों का जाप

- ॐ नमः शिवाय॥


- गंगाधरय नमः तुभ्यं, संस्थितोऽसि जटाधरे। अर्घ्यं गृहाण देवेश, गंगापुत्र नमोऽस्तु ते॥


गंगा सप्तमी पर दान का महत्व

गंगा सप्तमी पर पूजा के बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को जल, सत्तू और फल का दान करें। इससे पूजा का फल कई गुना बढ़ता है। गंगा चालीसा का पाठ करने से जातक के सभी पाप नष्ट होते हैं और मां गंगा प्रसन्न होती हैं।


गंगा सप्तमी का शुभ मुहूर्त

हिन्दू पंचांग के अनुसार, गंगा सप्तमी तिथि का आरंभ 22 अप्रैल को रात 10:50 बजे होगा और 23 अप्रैल को रात 8:50 बजे समाप्त होगा। इस दिन कई लोग व्रत और पूजा करते हैं।


गंगा सप्तमी का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। मां गंगा का वेग इतना तेज था कि अगर वह सीधे पृथ्वी पर आती तो काफी परेशानी हो सकती थी। इसलिए भगवान शिव ने गंगा के वेग को अपनी जटाओं में समाहित कर लिया। गंगा सप्तमी के दिन गंगा में स्नान करने से अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है।


गंगा सप्तमी पर लाभ

पंडितों के अनुसार, इस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा में स्नान करें। यदि गंगा में स्नान नहीं कर पा रहे हैं, तो घर में पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद तांबे के लोटे में पानी लेकर उसमें गंगाजल मिलाकर अर्घ्य दें। मंदिर में बैठकर मां गंगा के मंत्र का जाप करें और जरूरतमंदों को दान करें।