गणेश उत्सव: विसर्जन के नियम और विधि
गणेश उत्सव के दूसरे दिन, जानें गणपति बप्पा की स्थापना और विसर्जन के नियम। इस लेख में हम बताएंगे कि कैसे सही विधि से गणेश जी की विदाई करने से आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। साथ ही, जानें कि किस प्रकार की मूर्ति का चयन करना चाहिए और किस दिशा में स्थापित करना चाहिए।
Aug 28, 2025, 18:33 IST
गणेश उत्सव का महत्व
आज, 28 अगस्त को गणेश उत्सव का दूसरा दिन मनाया जा रहा है। गणेश चतुर्थी के 10वें दिन गणपति बप्पा का विसर्जन पारंपरिक रूप से किया जाता है। यदि आपने इस वर्ष गणपति की प्रतिमा अपने घर में स्थापित की है, तो यह जानना आवश्यक है कि आप अनंत चतुर्दशी से पहले भी बप्पा की विदाई कर सकते हैं। गणेश चतुर्थी के दिन पूजा-अर्चना के साथ गणेश जी की स्थापना की जाती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।
गणेश विसर्जन के समय
गणेश चतुर्थी के अलावा, आप डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन और सात दिन के बाद भी गणपति बप्पा का विसर्जन कर सकते हैं। हालांकि, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विधि-विधान और शुभ मुहूर्त का पालन किया जाए। सही तरीके से गणपति बप्पा को विदा करने से भगवान गणेश आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं।
गणेश स्थापना के नियम
गणेश स्थापना नियम
गणपति बप्पा की स्थापना के लिए ऐसी मूर्ति का चयन करें, जिसमें भगवान गणेश की सूंड़ बाईं ओर झुकी हो। यह शुभ माना जाता है।
भगवान गणेश की बैठी हुई प्रतिमा को घर लाना भी शुभ है, क्योंकि इससे सुख और समृद्धि का वास होता है।
गणपति की मूर्ति का चेहरा हंसमुख और प्रसन्न होना चाहिए, एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में और दूसरे हाथ में मोदक होना चाहिए।
गणेश भगवान की प्रतिमा को हमेशा ईशान कोण दिशा में रखना चाहिए।
प्रतिमा को चौकी पर रखने से पहले उसे अच्छे से साफ करें और गंगाजल से पवित्र करें।
गणपति बप्पा के पास रिद्धि-सिद्धि का स्थान अवश्य दें। यदि मूर्तियां उपलब्ध नहीं हैं, तो उनकी जगह सुपारी रख सकते हैं।
भगवान गणेश की दाईं ओर जल से भरा कलश स्थापित करें और फिर फूल और अक्षत लेकर गणपति बप्पा का ध्यान करें।
गणेश विसर्जन के नियम
गणेश विसर्जन नियम
आप अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार भगवान गणेश को 1.5 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन तक घर में रख सकते हैं। विसर्जन का समय पूरी तरह से आपके समय, श्रद्धा और व्यवस्था पर निर्भर करता है। जिस दिन आप गणपति को विसर्जित करना चाहें, पहले विधि-विधान से पूजा करें और आरती करने के बाद गणपति बप्पा को विदा करें।