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गणेश विसर्जन 2026: जानें शुभ मुहूर्त और विसर्जन की विधि

गणेश चतुर्थी के बाद विसर्जन की तैयारियों में हर घर में हलचल है। इस वर्ष 20 सितंबर को बप्पा की विदाई के लिए कई शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। क्या महिलाएं भी विसर्जन कर सकती हैं? जानें उत्तर पूजा का महत्व और विसर्जन की विधि। अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है, जो गणेश विसर्जन का प्रमुख दिन माना जाता है।
 

गणेश चतुर्थी के बाद विसर्जन की तैयारियां


नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी के अवसर पर बप्पा की स्थापना के बाद, अब विसर्जन की तैयारियां हर घर में जोरों पर हैं। कुछ परिवार अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति को विदाई देते हैं, जबकि अन्य अपनी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पहले ही बप्पा को विसर्जित कर देते हैं। इस वर्ष 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई गई थी, जिससे 19 सितंबर छठा दिन बनता है। लेकिन पंचांग के अनुसार, गणेश विसर्जन के लिए तीसरा, पांचवां, सातवां दिन और अनंत चतुर्दशी का दिन सबसे शुभ माने जाते हैं। इसलिए 19 सितंबर की बजाय 20 सितंबर, यानी सातवें दिन बप्पा को विदाई देना अधिक शुभ रहेगा।


गणेश विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त

20 सितंबर 2026 को गणेश विसर्जन के लिए कई शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। सुबह का चर, लाभ और अमृत मुहूर्त 07:40 से 12:14 बजे तक रहेगा। दोपहर में शुभ मुहूर्त 13:46 से 15:17 बजे तक है। शाम के समय शुभ, अमृत और चर मुहूर्त 18:20 से 22:46 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, रात में लाभ मुहूर्त 21 सितंबर की तड़के 01:43 से 03:12 बजे तक और उषाकाल में शुभ मुहूर्त 04:40 से 06:09 बजे तक रहेगा।


क्या महिलाएं भी कर सकती हैं विसर्जन?

यह धारणा है कि गणेश विसर्जन केवल पुरुष ही कर सकते हैं, लेकिन शास्त्रों में ऐसा कोई नियम नहीं है। यदि घर में महिलाएं गणपति की पूजा करती हैं, तो वे भी उत्तर पूजा में शामिल होकर प्रतिमा को विदाई दे सकती हैं। बच्चे भी विधि-विधान से बप्पा की पूजा करके उन्हें विदा कर सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा, स्वच्छता और सही विधि का पालन करना।


उत्तर पूजा का महत्व

गणपति को विदा करने से पहले उत्तर पूजा और आरती की परंपरा निभाई जाती है। इसे गणेशोत्सव की अंतिम और विदाई पूजा माना जाता है। इस पूजा में सबसे पहले गणपति की प्रतिमा के सामने दीप जलाया जाता है, फिर उन्हें फूल, अक्षत, दूर्वा, धूप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद आरती करके परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है और स्थापना के समय लिए गए संकल्प को पूर्ण मानते हुए बप्पा को श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है। इसके बाद प्रतिमा को सम्मान के साथ विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है, जिसे गणेश विसर्जन का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।